MP IAS Transfer News : मध्य प्रदेश में कलेक्टरों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर सरकार का फोकस अब सिर्फ फाइलों और योजनाओं की प्रगति तक सीमित नहीं रहने की चर्चा है। किसानों, विस्थापितों और आम लोगों की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है। IAS अधिकारियों की तीसरी तबादला सूची को लेकर सरकार में मंथन तेज है और जिलों से मिले जमीनी फीडबैक को संभावित प्रशासनिक फेरबदल का आधार बनाए जाने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के बीच प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चर्चा हो चुकी है। सरकार जिलों से मिले फीडबैक और अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। तीसरी तबादला सूची में कुछ कलेक्टरों के साथ मंत्रालय स्तर पर पदस्थ वरिष्ठ IAS अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक संभावित तबादलों को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
पन्ना जिला संभावित तीसरी तबादला सूची को लेकर सबसे अधिक चर्चा में है। केन-बेतवा लिंक परियोजना और रुंझ-मझगवां परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और अन्य समस्याओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। सरकार की नजर इस बात पर भी बताई जा रही है कि बड़े प्रोजेक्टों से प्रभावित लोगों की शिकायतों का स्थानीय प्रशासन ने किस स्तर तक समाधान किया। खजुराहो में मुख्यमंत्री मोहन यादव की हालिया बैठक के दौरान मिले फीडबैक के बाद पन्ना कलेक्टर उषा परमार के संभावित तबादले की चर्चा तेज हुई है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम फैसला तबादला आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
किसानों से जुड़े मामलों को लेकर नर्मदापुरम और हरदा जिले भी सरकार की नजर में बताए जा रहे हैं। इन जिलों में किसान समस्याओं, स्थानीय आंदोलनों और शिकायतों के निराकरण को लेकर प्रशासनिक कामकाज का फीडबैक लिए जाने की चर्चा है। नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा और हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन के नाम संभावित तबादलों को लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा में हैं। सरकार ऐसे अधिकारियों को प्राथमिकता देना चाहती है, जो किसान और आम जनता से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय ले सकें।
राजगढ़ जिले में जमीन के रिकॉर्ड और नक्शों से जुड़ी शिकायतें भी सरकार की चिंता का विषय बताई जा रही हैं। विशेष रूप से जीरापुर तहसील में जमीनों के नक्शों की उपलब्धता, सीमांकन और कब्जे से जुड़े विवादों की शिकायतें सामने आने की चर्चा है। राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी या देरी के कारण जमीन के स्वामित्व और सीमाओं को लेकर लंबे विवाद पैदा हो सकते हैं। ऐसे में राजगढ़ कलेक्टर के कामकाज को लेकर भी फीडबैक की समीक्षा किए जाने की चर्चा है।
तीसरी IAS तबादला सूची केवल कलेक्टरों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। मंत्रालय में पदस्थ कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त प्रभार को भी कम किया जा सकता है। सुखवीर सिंह के पास लोक निर्माण विभाग के साथ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है। वहीं मनीष सिंह के तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रभार और ई. रमेश कुमार के विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव की चर्चा है।
भोपाल स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग में भी प्रशासनिक बदलाव की अटकलें हैं। विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली और आपसी समन्वय को लेकर सरकार के स्तर पर फीडबैक लिए जाने की चर्चा है। मंत्री निर्मला भूरिया की ओर से विभागीय कामकाज को लेकर असंतोष की खबरों के बीच सचिव जीवी रश्मि और संचालक निधि निवेदिता की जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना पर भी नजर बनी हुई है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के पदभार संभालने के बाद IAS अधिकारियों की दो तबादला सूचियां जारी हो चुकी हैं और अब तीसरी सूची को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज है। इस बार सरकार का फोकस रूटीन ट्रांसफर के साथ अधिकारियों के प्रदर्शन और जमीनी फीडबैक पर रहने की चर्चा है। किसान, विस्थापित, राजस्व रिकॉर्ड, जनशिकायत और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मुद्दे अधिकारियों के मूल्यांकन में अहम हो सकते हैं। हालांकि किन अधिकारियों का तबादला होगा और किसे नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसकी तस्वीर आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी।