MP Teacher Job Security: मध्य प्रदेश के अतिथि विद्वानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अतिथि विद्वानों की बहुप्रतीक्षित मांगों को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है।
उन्होंने उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को निर्देश दिए हैं कि वे एक समिति का गठन करें और अन्य राज्यों, विशेषकर 'हरियाणा मॉडल' का अध्ययन कर उसे राज्य में लागू करने की दिशा में कदम उठाएं।
प्रदेश के अतिथि विद्वान लंबे समय से हरियाणा की तर्ज पर अपनी सेवाओं को सुरक्षित करने और समान वेतन की मांग को लेकर संघर्षरत थे। इस मॉडल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं। इस व्यवस्था के तहत 5 साल का अनुभव रखने वाले योग्य शिक्षकों को सेवानिवृत्ति (62 से 65 वर्ष) तक सेवा से नहीं हटाया जाएगा। इससे अतिथि विद्वानों को भविष्य की चिंता से मुक्ति मिलेगी। हरियाणा मॉडल के अनुसार, यूजीसी (UGC) के नियमों का पालन करते हुए अतिथि विद्वानों को हर महीने लगभग 57,700 रुपये का न्यूनतम वेतन देने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मामले में पूरी तरह से अतिथि विद्वानों के साथ है। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री को निर्देशित किया है कि समिति बनाकर जल्द से जल्द उन राज्यों के मॉडलों का खाका तैयार किया जाए, जिन्हें मध्य प्रदेश में लागू किया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति जो भी मॉडल प्रस्तावित करेगी, सरकार उसे लागू करने के लिए अपना पूरा समर्थन देगी।
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मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद से ही अतिथि विद्वानों में उम्मीद की किरण जगी है। यदि यह मॉडल पूरी तरह लागू होता है, तो प्रदेश के हजारों अतिथि विद्वानों के करियर को न केवल स्थिरता मिलेगी, बल्कि उनके आर्थिक हालात में भी बड़ा सुधार आएगा।
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