MP में DGP के रिटायरमेंट पर फंसा प्रशासनिक पेंच फोटो सोर्स - सोशल मीडिया
भोपाल

MP में DGP के रिटायरमेंट पर फंसा प्रशासनिक पेंच, तारीख बढ़ने की चर्चा से गरमाई सियासत, नियमों पर मचा घमासान

MP DGP News : पीएचक्यू की नोटशीट से बढ़ा विवाद। डीजीपी कैलाश मकवाना का कार्यकाल 2 दिन बढ़ाने के प्रस्ताव पर उठा सवाल। डीजी जेल डॉ. वरुण कपूर ने मुख्य सचिव और गृह विभाग के एसीएस से मिलकर जताई आपत्ति।

सुधीर दंडोतिया, शाजेब खान

Highlights :

  • मध्य प्रदेश के DGP कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति तारीख पर विवाद सामने आया था।

  • पुलिस मुख्यालय ने 2 दिसंबर 2026 तक कार्यकाल मानने का प्रस्ताव भेजा था।

  • गृह विभाग का तर्क था कि नियुक्ति 1 दिसंबर 2024 से प्रभावी हुई थी।

  • डॉ. वरुण कपूर की आपत्ति को लेकर भी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं।

MP DGP Kailash Makwana Retirement : मध्य प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर चल रहा असमंजस खत्म होता नजर आ रहा है। पुलिस मुख्यालय की ओर से कार्यकाल दो दिन बढ़ाकर 2 दिसंबर 2026 तक करने के प्रस्ताव के बाद प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई थी।

क्या है पूरा मामला?

मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाना मूल रूप से 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने 2 दिसंबर 2024 को डीजीपी पद का पदभार ग्रहण किया था। हाल ही में पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा से गृह विभाग को एक नोटशीट भेजी गई जिसमें ये तर्क दिया गया कि चूंकि मकवाना ने 2 दिसंबर को कार्यभार संभाला था। इसलिए उनके रिटायरमेंट की तारीख भी 2 दिसंबर 2026 होनी चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों की आपत्ति और मुलाकात

इस नोटशीट के सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट शुरू हो गई। डीजीपी पद की रेस और वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर चल रहे जेल डीजी डॉ. वरुण कपूर ने मुख्य सचिव (CS) अशोक बर्णवाल और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय शुक्ला से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, डॉ. कपूर ने डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए पीएचक्यू की इस नोटशीट पर मौखिक रूप से कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि कार्यकाल की गणना और सेवानिवृत्ति के नियम स्पष्ट हैं और इसमें इस तरह का बदलाव तकनीकी रूप से सही नहीं है।

क्यों अहम है ये दो दिन का फेरबदल?

नियमों का पेंच: डीजीपी पद के लिए नियम है कि अधिकारी के रिटायरमेंट में कम से कम 6 महीने की अवधि शेष होनी चाहिए।

वरिष्ठता पर असर: यदि डीजीपी मकवाना का कार्यकाल दो दिन बढ़कर दिसंबर तक पहुंचता है, तो डॉ. वरुण कपूर रेस से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि वे 30 नवंबर 2026 से ठीक 6 महीने बाद रिटायर होंगे।

नया समीकरण: यदि कपूर बाहर होते हैं, तो पैनल में चौथे स्थान पर मौजूद स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव डीजीपी की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।

गृह विभाग ने नियुक्ति आदेश को माना आधार

गृह विभाग का तर्क था कि मकवाना की नियुक्ति 1 दिसंबर 2024 से प्रभावी हुई थी। ऐसे में दो साल के कार्यकाल की गणना पदभार संभालने की वास्तविक तारीख के बजाय नियुक्ति आदेश में दर्ज प्रभावी तारीख से की जानी चाहिए। इसी आधार पर 30 नवंबर 2026 को उनका कार्यकाल पूरा होने की तारीख माना गया।

वरुण कपूर की आपत्ति की चर्चा

इस विवाद के बीच जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर की मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला से मुलाकात की खबरें भी सामने आई थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने DGP की नियुक्ति से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी।

नए DGP की चयन प्रक्रिया पर नजर

सेवानिवृत्ति की तारीख का मामला इसलिए भी अहम था, क्योंकि नए DGP के चयन के लिए पात्र अधिकारियों और UPSC पैनल की प्रक्रिया चल रही है। पहले आई रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई थी कि तारीख दो दिन आगे बढ़ने से कुछ अधिकारियों की पात्रता प्रभावित हो सकती है। अब 30 नवंबर की तारीख को बरकरार रखने की खबर के बाद चयन प्रक्रिया पर आगे के आधिकारिक कदम महत्वपूर्ण होंगे।

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