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भोपाल

MP Cabinet Review: मोहन सरकार का 'महा-रिव्यू': मंत्रियों को देना होगा हिसाब, खराब परफॉर्मेंस पर गिरेगी गाज

CM Mohan Yadav Cabinet Expansion: पहली बार सरकार के साथ भाजपा संगठन के दिग्गज भी करेंगे मंत्रियों के काम की समीक्षा।टू-लेयर फिल्टर: 17 मई को मंत्रियों से पूछताछ, रिजल्ट के बाद मंत्रियो का भविष्य तय

सुधीर दंडोतिया

Mohan Yadav Cabinet Reshuffle: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार के ढाई साल का कार्यकाल आने वाले 13 जून को पूरा होने जा रहा है। इससे ठीक पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। 17 मई को मंत्रिमंडल के कामकाज के रिव्यू की तैयारी है।17 मई को होने वाले मंत्रिमंडल के कामकाज के रिव्यू को लेकर सत्ता और संगठन दोनों ही अलर्ट मोड पर हैं। इस बार का रिव्यू रूटीन न होकर काफी 'टफ' माना जा रहा है क्योंकि इसमें पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों की मौजूदगी रहेगी।

संगठन के सामने पेश होगा रिपोर्ट कार्ड

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जमवाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मौजूद रहेंगे। प्रत्येक मंत्री को अपना पक्ष रखने के लिए मात्र 15 मिनट का समय मिलेगा, जिसमें उन्हें 11 पूर्व निर्धारित बिंदुओं पर जवाब देना होगा।

'टू-लेयर' चेकिंग

सरकार ने इस बार मंत्रियों के दावों को परखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंत्रियों के 'वन-टू-वन' इंटरव्यू के बाद 25 मई को संबंधित विभागों की भी समीक्षा की जाएगी। यदि मंत्री के दावों और विभाग की जमीनी हकीकत में अंतर पाया गया, तो इसे परफॉर्मेंस में बड़ी गिरावट माना जाएगा। यह रिपोर्ट संगठन के जरिए दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी।मंत्रियों से 11 बिंदुओं पर 15-15 मिनट का वक्त दिया जाएगा। इस रिव्यू को मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। इस समय मंत्रिमंडल में तीन पद रिक्त हैं। रिव्यू के बाद तय होगा कि मंत्रिमंडल से ​किन-किन लोगों की छुट्टी होगी।

इन बिंदुओं पर होगी बात

  • सरकार की प्रमुख योजनाओं में कितनी भागीदारी की है?
  • प्रभार के जिलों में कितनी बार गए, कितनी बैठकें कीं। लिखित जानकारी ली जा सकती है।
  • प्रभार के जिलों, गृह जिलों में पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय कैसा रहा। शिकायतों को सामने रखकर बात होगी।
  • जो कैबिनेट मंत्री हैं, उन्होंने अपने राज्यमंत्रियों को कितना काम दिया।
  • पार्टी के संकल्पों का विभाग में कितना और कैसे पालन कराया है, उसकी जानकारी ली जा सकती है।
  • मंत्रियों से विभाग के बारे में पूछने और फीडबैक लेकर जब विभागों का रिव्यू होगा, उसमें इसे रखा जाएगा।
  • प्रभार के जिलों में अशासकीय नामांकन और अलग-अलग तरह की समितियों का गठन कब किया। कितना बाकी है और क्यों?
  • खुद की विधानसभा, गृह जिला और प्रभार वाले क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिति कैसी है। पड़ोस की हारी हुई विधानसभाओं के बारे में मंत्री का फीडबैक क्या है। इस फीडबैक को पार्टी के फीडबैक से बाद में मिलाया जा सकता है।

मंत्रिमंडल फेरबदल के संकेत

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस टू-लेयर रिव्यू के बाद मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल हो सकता है। वर्तमान में मंत्रिमंडल में तीन पद रिक्त हैं। माना जा रहा है कि खराब रिपोर्ट कार्ड वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह नए चेहरों को मौका देकर सरकार की छवि और कार्यक्षमता को नई ऊर्जा दी जाएगी।

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