मध्य प्रदेश यूसीसी (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज) 
भोपाल

मध्य प्रदेश में UCC पर आया सबसे बड़ा अपडेट, सुझावों की समय-सीमा खत्म; अब 60 दिनों में तैयार होगा फाइनल ड्राफ्ट

UCC In MP: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) पर प्रक्रिया तेज; सुझावों की अवधि समाप्त, समिति को 9 बिंदुओं पर फाइनल ड्राफ्ट बनाने हेतु मिला 60 दिनों का समय।

सजल रघुवंशी

Madhya Pradesh Uniform Civil Code Draft: मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) यानी समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष समिति को आम जनता, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों से सुझाव प्राप्त करने के लिए 15 दिनों की समय-सीमा दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इसके साथ ही यूसीसी पर अगला और महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है।

अब समिति को प्राप्त सभी सुझावों का गहन अध्ययन किया जाएगा। निर्धारित अवधि के बाद नए सुझाव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। समिति कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से हर सुझाव की समीक्षा करेगी ताकि ऐसा ड्राफ्ट तैयार हो सके जो प्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप हो।

9 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित होगा यूसीसी

सूत्रों के अनुसार, यूसीसी का प्रारूप 9 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित होगा। इसमें विवाह, तलाक, संपत्ति का बंटवारा, उत्तराधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया, भरण-पोषण और पारिवारिक अधिकारों जैसे विषय शामिल रहेंगे। इन मुद्दों पर वर्तमान में अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानून लागू हैं, जिन्हें एक समान कानूनी ढांचे में लाने की कोशिश की जा रही है।

ड्राफ्ट तैयार करने के लिए दिया गया 60 दिनों का समय

समिति को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) ड्राफ्ट तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। इस अवधि में विशेषज्ञों, विधि सलाहकारों और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। सूत्रों का कहना है कि यदि समिति तय समय पर रिपोर्ट सौंप देती है, तो अगस्त 2026 में राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार मानसून सत्र के दौरान इसे पारित कराने की तैयारी में है।

यूसीसी पर तेज हो सकती है राजनीतिक बहस

राजनीतिक दृष्टि से यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद मध्य प्रदेश दूसरा बड़ा राज्य बन सकता है जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी। हालांकि इस मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से सीधे जुड़ा विषय है।

कानून लागू होने के बाद प्रदेश में विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे। अब पूरे प्रदेश की नजर समिति की समीक्षा और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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