

MP Police AI Surveillance System: मध्यप्रदेश में अपराध नियंत्रण और आधुनिक पुलिसिंग को नई दिशा देने के लिए पुलिस विभाग ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने कहा है कि प्रदेशभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित लगभग 1 लाख सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इन कैमरों का उपयोग अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। साथ ही अगले तीन वर्षों में “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।
पुलिस मुख्यालय में आयोजित जोनल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक और विशेष सशस्त्र बल जोन की दो दिवसीय समीक्षा बैठक के समापन सत्र में डीजीपी मकवाणा ने पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे केवल औपचारिकता न बनें, बल्कि वे लगातार चालू रहें और अपराधियों की पहचान तथा अपराध नियंत्रण में प्रभावी रूप से उपयोग किए जाएं।
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा पर जोर देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय सहित अन्य अदालतों में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी मामलों और रिट याचिकाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाए। समयसीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत कर मामलों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने विभागीय जांच प्रकरणों को लंबित न रखने के निर्देश दिए तथा पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली के शत-प्रतिशत उपयोग पर बल दिया। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और गति आएगी। साथ ही स्थानांतरित अधिकारियों और कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से भारमुक्त करने के निर्देश भी दिए गए।
कैलाश मकवाणा ने कहा कि प्रदेश को अगले तीन वर्षों में नशामुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान संचालित होगा। शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को चरणबद्ध तरीके से ड्रग फ्री जोन बनाया जाएगा।
बैठक में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों के त्वरित समाधान पर भी चर्चा हुई। डीजीपी ने निर्देश दिए कि जिला पुलिस अधीक्षक हर महीने सिविल सर्जन के साथ बैठक करें और उपचार सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चिन्हित अस्पतालों के साथ एमओयू किए जाएं।
बैठक में महिलाओं के खिलाफ अपराध, हत्या, डकैती, मॉब लिंचिंग और एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई कार्रवाई की समीक्षा भी की गई। पुलिस विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी और सख्त अभियान से अपराध नियंत्रण को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।