शराब माफिया को लेकर जीतू पटवारी ने मोहन सरकार को घेरा।
जहरीली शराब से मौतों पर सरकार से मांगा जवाब।
खातेगांव TI दिलीप पुरी की मौत का मुद्दा उठाया।
अवैध शराब के कारोबार पर पुलिस-आबकारी विभाग से सवाल।
शराब माफिया के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की मांग।
Jitu Patwari Raise Question On Illegal Liquor MP: मध्य प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार और शराब माफिया की बढ़ती दबंगई अब कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जहरीली शराब से लगातार हो रही मौतों से लेकर तस्करी रोकने पहुंचे पुलिस अधिकारी की कथित हत्या तक, प्रदेश में सामने आई घटनाओं ने मोहन सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए शराब माफिया के आगे बेबस होने का आरोप लगाया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर हमला बोला है। उनका आरोप है कि प्रदेश में शराब माफिया के हौसले बुलंद हैं और सरकार उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रही है। लगातार सामने आ रही जहरीली शराब से मौतों की घटनाएं और पुलिस अधिकारी की हत्या जैसे मामले सरकार के लिए गंभीर चुनौती हैं।
अवैध शराब का कारोबार प्रदेश में इतना बेखौफ कैसे चल रहा है?
खातेगांव में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत के लिए जिम्मेदार तस्करों और उनके नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई कब होगी?
सागर और देवास में जहरीली शराब से हुई मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संरक्षण देने वालों की जवाबदेही कब तय होगी?
आबकारी विभाग और पुलिस की निगरानी के बावजूद अवैध शराब की आपूर्ति कैसे जारी रही?
क्या सरकार प्रदेश में सक्रिय शराब माफिया के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करेगी?
ताजा मामला देवास जिले के खातेगांव का है, जहां थाना प्रभारी दिलीप पुरी अपनी टीम के साथ नेमावर रोड हाईवे पर अवैध शराब की तस्करी रोकने पहुंचे थे। इसी दौरान शराब तस्करी में इस्तेमाल हो रहे ट्रक के चालक ने कथित तौर पर उन्हें कुचल दिया। इस दर्दनाक घटना में थाना प्रभारी की मौके पर ही मौत हो गई। कानून के रखवालों पर इस तरह का हमला प्रदेश में अपराधियों के बढ़ते हौसलों और पुलिस के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है।
सितंबर 2026 में सागर जिले के नौराजा, घूघरा खुर्द और आसपास के गांवों में जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की मौत का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद अवैध शराब की बिक्री और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठे थे। सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर गांवों में जहरीली शराब का कारोबार लंबे समय तक कैसे चलता रहा और जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
अक्टूबर 2026 में देवास जिले के चंदाना-बिंजाना और आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों का मामला सामने आया। पुलिस जांच में कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने, रसायनों की खरीद और लाइसेंसी शराब दुकानों से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। इस मामले ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण के दावों पर सवाल खड़े कर दिए।