क्या है भोपाल मास्टर प्लान 2047 (सोर्स- नवभारत लाइव डिजाइन इमेज)
भोपाल

भोपाल मास्टर प्लान-2047: सुधीर दंडोतिया के साथ 8 सवालों में जानें कैसी होगी आपकी लेक सिटी?

Bhopal Master Plan 2047: 2 दशक के लंबे इंतजार के बाद जारी हुआ भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट, नवभारत लाईव के स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया के विश्लेषणात्मक नजरिए से समझिए आपकी लेक सिटी का पूरा खाका।

सुधीर दंडोतिया, सजल रघुवंशी

Bhopal Master Plan 2047 Explained By Sudhir Dandotiya: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नियोजित विकास के लिए दो दशक से अटके नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट आखिरकार जारी कर दिया गया है। विजन 2047 को केंद्र में रखकर तैयार किए गए इस नए ड्राफ्ट को मध्य प्रदेश के सीनियर जर्नलिस्ट और नवभारत लाईव के स्टेट हेड सुधीर दंडोतिया ने समय की सबसे बड़ी जरूरत और सरकार का एक बेहद अहम निर्णय बताया है।

एक पत्रकार और नागरिक के तौर पर सुधीर दंडोतिया का मानना है कि नियमों के तहत हर दस साल में नया मास्टर प्लान आना चाहिए, लेकिन भोपाल में दो दशक तक यह प्रक्रिया अटकी रही, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को अनियंत्रित विकास के रूप में भुगतना पड़ा। आइए, सुधीर दंडोतिया के नजरिए से इन 8 आसान सवालों के जरिए समझते हैं कि आने वाले दो दशकों में कैसी होगी आपकी 'लेक सिटी' की नई तस्वीर:

सवाल 1: भोपाल का नया मास्टर प्लान क्या है और इसका विजन क्या है?

जवाब: यह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए तैयार किया गया नया ड्राफ्ट है। इसे 'विजन 2047' को केंद्र में रखकर बनाया गया है। इसमें अगले दो दशकों (2047 तक) की 45 लाख की अनुमानित आबादी, बुनियादी ढांचे, ट्रांसपोर्ट और पर्यावरण की जरूरतों का ध्यान रखा गया है। यह प्लान 1016.90 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र और 254 गांवों को कवर करेगा।

सवाल 2: इस नए मास्टर प्लान की जरूरत क्यों पड़ी? पिछला प्लान कब आया था?

जवाब: राजधानी भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 2005 में समाप्त हो गया था (यह 1995 में लागू हुआ था)। 2010 में एक प्रारूप बना था, लेकिन आपत्तियों के कारण उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लगभग दो दशकों से नया प्लान न होने के कारण शहर का विकास बेतरतीब ढंग से (रहवासी क्षेत्रों में मार्केट बनना, ट्रैफिक जाम) हो रहा था। इस अनियंत्रित फैलाव को रोकने के लिए नया प्लान जरूरी था।

सवाल 3: इस मास्टर प्लान के मुख्य आधार या स्तंभ क्या हैं?

जवाब: इस ड्राफ्ट को चार प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है:

  • प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण

  • आधुनिक दृष्टिकोण एवं नागरिक हितैषी नियोजन

  • सुधारोन्मुख एवं परिवर्तनकारी नियोजन

  • आत्मनिर्भर एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाला विकास

सवाल 4: पर्यावरण और हरियाली को लेकर नए प्लान में क्या खास प्रावधान हैं?

जवाब: शहर की हरियाली पर विशेष ध्यान दिया गया है:

  • शहर का हरित क्षेत्र (Green Area) 16% से बढ़ाकर लगभग 27% कर दिया गया है।

  • रामसर साइट भोजताल (बड़ी झील), पहाड़ों, वन क्षेत्रों और बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं।

  • हरित TDR (Transferable Development Rights): हरित क्षेत्र में आने वाली निजी जमीनों के स्वामियों को मुआवजे के रूप में TDR मिलेगा, जिससे वे अन्य जगह अतिरिक्त विकास कर सकेंगे। भानपुर खंती पर गोल्फ कोर्स का भी प्रस्ताव है।

सवाल 5: शहर के आर्थिक विकास के लिए 'ग्रोथ कॉरिडोर' क्या है?

जवाब: निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर प्रस्तावित है। यह एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (EKAI) सिटी, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक और थोक व्यापार क्षेत्रों को जोड़ेगा। इस कॉरिडोर में बीआरटीएस (BRTS) चलेगा और होटल, आईटी सेक्टर, हाईपर मार्केट जैसी गतिविधियां विकसित होंगी। यहां असीमित एफएआर (FAR) और मिश्रित उपयोग (Mix Land Use) की अनुमति होगी।

सवाल 6: मकान बनाने और पुरानी कॉलोनियों के विकास के नियम कैसे बदले हैं?

जवाब: नागरिकों की सुविधा के लिए कई बदलाव हुए हैं:

  • नियमों का सरलीकरण: भवन निर्माण में भूतल कवरेज (Ground Coverage) की बाध्यता हटा दी गई है। चौड़ी सड़कों पर भवन की ऊंचाई और FAR की सीमा मुक्त रखी गई है।

  • क्रिएटिव पुनर्विकास: अगर किसी पुरानी कॉलोनी के 70% रहवासी (RWA) सहमत हों, तो वे अपनी कॉलोनी या आवासीय अपार्टमेंट का खुद पुनर्विकास कर सकेंगे।

  • मिक्स लैंड यूज: कार्यस्थल और आवास (Work & Home) पास-पास हो सकें, इसलिए सड़कों की चौड़ाई के आधार पर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की छूट दी गई है।

सवाल 7: शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था (पार्किंग) के लिए क्या प्लान है?

जवाब: डिजिटल ट्विन सिटी: अवैध निर्माण रोकने और रियल-टाइम निगरानी के लिए शहर को 'डिजिटल ट्विन सिटी' बनाया जाएगा। सुरक्षा- सार्वजनिक स्थानों के निजी सीसीटीवी कैमरों की नेटवर्किंग होगी और सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल पारदर्शी रखी जाएगी। पार्किंग- मल्टीलेवल पार्किंग, मैकेनाइज्ड पार्किंग, फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग और बेसमेंट पार्किंग के लिए भूखंडों को मिलाने (Amalgamation) की अनुमति दी गई है।

सवाल 8: सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के लिए क्या छूट दी गई है?

जवाब: अनाथ आश्रम, मूक-बधिर विद्यालय, दिव्यांग विशेष विद्यालय, वृद्धाश्रम और रैन बसेरा जैसी चैरिटेबल गतिविधियों को अतिरिक्त FAR खरीदने की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। इसके अलावा भौंरी क्षेत्र में एक एजुकेशन हब विकसित किया जाएगा।

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