Mohan Bhagwat Statement: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का खुला समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने अहंकार से बचने की सलाह दी थी।
दिग्विजय सिंह ने इस बयान पर सहमति जताने के साथ-साथ भागवत को राजनीति में धर्म के उपयोग को लेकर एक बड़ी नसीहत भी दे डाली है।
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर मोहन भागवत के संबोधन का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वह उनकी इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि किसी को भी अहं और अहंकार में नहीं डूबना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, “काश, सभी बड़े लोग इसे समझें।” कांग्रेस नेता ने आगे लिखा कि धर्म समुद्र के समान है और सभी धर्म इंसानियत के रास्ते पर चलना सिखाते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति लोगों को विभाजित करती है। इसलिए धर्म का इस्तेमाल कभी भी राजनीति में नहीं होना चाहिए।
दिग्विजय सिंह केवल बयान का समर्थन करके नहीं रुके, बल्कि उन्होंने मोहन भागवत से एक मांग भी कर दी। उन्होंने भागवत से कहा कि यदि वे वास्तव में इस बात से सहमत हैं, तो उन्हें खुले तौर पर इस बात का समर्थन करना चाहिए कि राजनीति में धर्म का उपयोग नहीं होना चाहिए। दिग्विजय ने चेताया कि ऐसा करने से ही उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी, अन्यथा जनता को उनकी 'कथनी और करनी' में साफ अंतर दिखाई देगा।
गौरतलब है कि शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित 'युवा धर्म संसद' में मोहन भागवत ने युवाओं को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने युवाओं को अहंकार से दूर रहने की नसीहत दी थी। भागवत ने सूर्य का उदाहरण देते हुए कहा था कि इंसान अक्सर अहंकार में यह मान बैठता है कि सब कुछ उसकी इच्छा और नियंत्रण से चल रहा है, जबकि सच्चाई इसके उलट है। उन्होंने कहा था, "जिसका उदय होता है, उसका अस्त भी होता है।"
इसके अलावा, भागवत ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति और बुढ़ापे या रिटायरमेंट तक सीमित न रखने की बात भी कही थी। उनके अनुसार धर्म जीवन के हर चरण में मौजूद रहता है। इस युवा धर्म संसद में करीब 1,700 युवा शामिल हुए थे। हालांकि भागवत ने अपने संबोधन में किसी नेता का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।