MP Vocational Trainers Protest: मध्य प्रदेश के शासकीय स्कूलों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत पिछले 10 वर्षों से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर भोपाल के अंबेडकर पार्क में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रशिक्षकों का आरोप है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें न सम्मानजनक वेतन मिल रहा है, न नौकरी की सुरक्षा और न ही श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले बुनियादी अधिकार।
प्रदेशभर से भोपाल पहुंचे व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कहा कि वे पिछले एक दशक से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन आज भी केवल 20 हजार रुपये के मानदेय पर काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों को इससे कहीं अधिक वेतन मिल रहा है, जबकि मध्य प्रदेश में अब तक वेतन वृद्धि नहीं की गई।
सीहोर से आए प्रशिक्षकों के अध्यक्ष ने कहा कि सरकार उन्हें अपना कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद व्यावसायिक प्रशिक्षकों को आउटसोर्सिंग व्यवस्था में धकेल दिया गया। इससे पहले वह एसएएमडीसी (स्कूल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट कमीटी) के माध्यम से कार्य कर रहे थे। उनका आरोप है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू होने के बाद उनकी नौकरी की सुरक्षा और अन्य सुविधाएं और अधिक प्रभावित हुई हैं।
एक महिला व्यावसायिक शिक्षिका ने आरोप लगाया कि यदि कोई महिला प्रशिक्षक मातृत्व अवकाश पर जाती है तो उसे दोबारा सेवा में लेने के बजाय हमेशा के लिए नौकरी से हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों के लिए यह स्थिति बेहद असुरक्षित और चिंताजनक है।
प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि संगठन अपनी मांगों को लेकर कई बार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और डीपीआई कार्यालय तक आवेदन दे चुका है तथा प्रदर्शन भी कर चुका है। लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया और न ही उनकी समस्याओं पर गंभीरता से सुनवाई हुई। उनका कहना है कि मजबूर होकर अब उन्हें अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
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प्रदर्शनकारी प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी चार सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि सरकार यदि जल्द निर्णय लेती है तो वे दोबारा पूरी निष्ठा के साथ विद्यालयों में लौटकर विद्यार्थियों के कौशल विकास का कार्य करेंगे।
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