भोपाल में नर्सिंग छात्रों ने की आत्महत्या की कोशिश (सोर्स- नवभारत लाइव)
भोपाल

भोपाल में नर्सिंग छात्रों का खतरनाक कदम; 6 मंजिला बिल्डिंग पर चढ़कर 3 छात्रों ने की आत्महत्या की कोशिश

Bhopal Nursing Students Suicide Attempt: नर्सिंग छात्रों के प्रदर्शन में हाई-वोल्टेज ड्रामा, 6 साल से अटकी डिग्री और रिजल्ट से परेशान 3 छात्र निर्माणाधीन बिल्डिंग पर चढ़कर आत्महत्या की कोशिश करने लगे।

शिवम दत्त तिवारी, सजल रघुवंशी

Nursing Students Protest Bhopal: भोपाल में नर्सिंग छात्रों का आंदोलन अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों में से तीन छात्र छह मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग पर चढ़ गए और आत्महत्या की कोशिश करने लगे।

छात्रों के बिल्डिंग पर चढ़ते ही मौके पर हड़कंप मच गया। नीचे बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और तीनों छात्रों को नीचे उतारने की कोशिश की जाती रही। सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की मौजूदगी को लेकर उठ रहा है।

आधे घंटे तक निर्माणाधीन बिल्डिंग के ऊपर खड़े रहे छात्र

छात्रों के मुताबिक, करीब आधे घंटे तक तीनों छात्र निर्माणाधीन बिल्डिंग पर ऊपर खड़े रहे, लेकिन इस दौरान कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। छात्रों का आरोप है कि जब उनकी जान पर बन आई है, तब भी जिला प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा। वहीं दूसरी तरफ नर्सिंग छात्र लगातार सरकार और नर्सिंग काउंसिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने पुतला जलाकर विरोध जताया और नोट उड़ाकर अपना आक्रोश जाहिर किया।

छह साल से अधर में है- नर्सिंग छात्र

दरअसल, नर्सिंग छात्रों का कहना है कि उनका भविष्य पिछले करीब छह साल से अधर में है। परीक्षा, रिजल्ट, डिग्री और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्याओं के कारण हजारों छात्र परेशान हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा है कि कुछ विद्यार्थियों की डिग्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया छह साल तक अटकी हुई है। नर्सिंग विवाद में कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता भी बड़ा मुद्दा रही है। मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अंतर्गत प्रदेश में करीब 450 से ज्यादा नर्सिंग स्कूल और कॉलेज संचालित हैं और इनमें एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग सहित कई पाठ्यक्रम चलते हैं।

कॉलेजों की मान्यता रद्द होने और विवादों के कारण पढ़ाई पर पड़ा असर

छात्रों का आरोप है कि कई कॉलेजों की मान्यता रद्द होने और विवादों के कारण उनकी पढ़ाई और करियर पर सीधा असर पड़ा है। उनका सवाल है कि अगर कॉलेजों की मान्यता या व्यवस्थाओं में गड़बड़ी थी, तो उसकी सजा उन छात्रों को क्यों मिले जिन्होंने फीस देकर पढ़ाई की? छात्रों की प्रमुख मांग है कि लंबित परीक्षाएं जल्द कराई जाएं, रिजल्ट जारी किए जाएं, डिग्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाए और मान्यता विवाद में फंसे छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार ठोस व्यवस्था करे। लेकिन अब आंदोलन का सबसे चिंताजनक पहलू सामने आया है। छह मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग पर तीन छात्रों का चढ़ना और आत्महत्या की कोशिश करना यह बताने के लिए काफी है कि छात्र किस हद तक मानसिक और प्रशासनिक दबाव महसूस कर रहे हैं।

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