BJP Councillors Against Sanskriti Jain: भोपाल नगर निगम में भाजपा पार्षद दल और एमआईसी सदस्यों की बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में आगामी पार्षद परिषद की बैठक के एजेंडे को लेकर विचार-विमर्श किया गया। इसी दौरान नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा पार्षदों की नाराजगी खुलकर सामने आई।
कई पार्षदों ने बैठक में कमिश्नर के काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठाए और अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। पार्षदों का कहना है कि वार्डों से जुड़ी समस्याओं को लेकर जब वह अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते हैं, तो उनकी शिकायतों को अपेक्षित गंभीरता नहीं मिलती।
बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाया कि कमिश्नर संस्कृति जैन उनकी समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुनती हैं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पार्षद सीधे जनता से जुड़े होते हैं और अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को लेकर नगर निगम प्रशासन तक बात पहुंचाते हैं। ऐसे में यदि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच प्रभावी संवाद नहीं होगा तो सड़कों, सफाई, पानी, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान मुश्किल होगा। पार्षदों ने इस मुद्दे को बैठक में प्रमुखता से उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
भाजपा पार्षदों ने बैठक में स्पष्ट संकेत दिए कि यदि कमिश्नर के व्यवहार और कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं आता है तो वे खुलकर विरोध का रास्ता अपना सकते हैं। कुछ पार्षदों ने कमिश्नर की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए यहां तक कहा कि उन्हें नगर निगम से जुड़े कानून और नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। पार्षदों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन को जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है तो संस्कृति जैन को नगर निगम से हटाकर वापस प्रशासनिक विभाग में भेजने की मांग भी उठ सकती है।
भाजपा पार्षद दल और एमआईसी सदस्यों की बैठक में आगामी पार्षद परिषद की बैठक के एजेंडे पर भी चर्चा की गई। ऐसे में माना जा रहा है कि कमिश्नर की कार्यप्रणाली को लेकर पार्षदों की नाराजगी का मुद्दा अगली बैठक में भी उठ सकता है। यदि पार्षद अपनी मांगों पर कायम रहते हैं तो नगर निगम परिषद की बैठक में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल भाजपा पार्षदों की नाराजगी ने राजधानी भोपाल के नगर निगम के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान के संकेत दे दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि निगम प्रशासन इस असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।