Fake Passport Racket Exposed By MP STF: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और डबरा में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय फर्जी पासपोर्ट घोटाले का खुलासा हुआ है। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो बांग्लादेश से भारत आए लोगों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय नागरिक बनाता था और फिर उन्हें पासपोर्ट दिलाकर विदेश भेजता था।
एसटीएफ की जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया है। भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र स्थित अन्ना नगर के एक मठ के पते से लगभग 40 लोगों के नाम पर पासपोर्ट जारी किए गए हैं। वहीं, डबरा की सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार कॉलोनी के एक ही पते से करीब 30 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए। ये सभी पासपोर्ट साल 2021 से 2023 के बीच जारी किए गए हैं।
स्पेशल टास्क फोर्स के मुताबिक, यह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। यह पहले बांग्लादेश से आए लोगों की जानकारी जुटाता था। इसके बाद उनके नाम से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार कराए जाते थे। इन्ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इनका भारतीय पता और पहचान पुख्ता की जाती थी और अंत में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता था।
इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले ये लोग खुद को बौद्ध अनुयायी बताकर विदेश यात्राएं कर रहे थे। एसटीएफ को इन लोगों के थाईलैंड, मलेशिया, चीन, श्रीलंका और जापान जाने की पुख्ता जानकारी मिली है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या इन यात्राओं का मकसद सिर्फ फर्जी पहचान का इस्तेमाल था, या इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा है।
एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक राहुल लोढ़ा ने बताया कि इस मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड 'रियाल चौधरी' जेल में बंद है। आरोपियों से पूछताछ के बाद इस गिरोह के तार असम से भी जुड़े होने की बात सामने आई है, जिसके बाद एसटीएफ की 5 सदस्यीय टीम असम रवाना हो गई है।
इस पूरे मामले ने पासपोर्ट जारी करने वाली पुलिस और स्थानीय सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) प्रक्रिया की पोल खोलकर रख दी है। एक ही मठ या विहार के पते से दर्जनों पासपोर्ट जारी हो जाना सिस्टम की एक बहुत बड़ी चूक है। एसटीएफ अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान इतनी बड़ी गड़बड़ी क्यों नहीं पकड़ी गई और इसमें कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे।