भिंड में ई-अटेंडेंस की मजबूरी और जान का जोखिम (सोर्स- सोशल मीडिया)
भिण्ड

भिंड: ई-अटेंडेंस के लिए जान जोखिम में डाल रहे शिक्षक, ट्यूब के सहारे उफनती बैसली नदी पार कर पहुंच रहे स्कूल

Teachers Crossing River: ई-अटेंडेंस की मजबूरी और जान का जोखिम, बैसली नदी के उफान पर आने से कटे रास्ते, स्कूल पहुंचने के लिए ग्रामीणों की मदद से ट्यूब पर बैठकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हुए शिक्षक।

योगेश पाराशर, सजल रघुवंशी

E-Attendance Challenge For Teachers: भिंड जिले में सरकारी स्कूलों तक पहुंचने के लिए शिक्षक और छात्र अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत बबेड़ी क्षेत्र में बारिश के दिनों में बैसली नदी के उफान पर आने से कई गांवों का संपर्क मुख्य रास्तों से कट जाता है। ऐसे में शिक्षक ई-अटेंडेंस के लिए समय पर स्कूल पहुंचने के लिए ट्यूब के सहारे उफनती नदी और नालों को पार कर रहे हैं। ग्रामीणों की मदद से शिक्षक ट्यूब पर बैठकर स्कूल पहुंचते हैं और छुट्टी के बाद इसी तरह वापस लौटते हैं।

जानकारी के अनुसार भिंड जिले की ग्राम पंचायत बबेड़ी में बारिश के दिनों की यह तस्वीर सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। बैसली नदी में पानी बढ़ने के बाद आसपास के खार और नाले भी उफान पर आ जाते हैं। इसके चलते नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा सहित कई गांवों का रास्ता बंद हो जाता है। ऐसे हालात में इन गांवों के सरकारी स्कूलों तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। शिक्षक और छात्र-छात्राएं ट्यूब के सहारे नदी और जलभराव वाले रास्तों को पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं।

ई-अटेंडेंस व्यवस्था के तहत निर्धारित समय पर पहुंच रहे शिक्षक

सबसे बड़ी परेशानी शिक्षकों के सामने है। डीपीआई की ई-अटेंडेंस व्यवस्था के तहत शिक्षकों को निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचकर पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होती है। शिक्षकों का कहना है कि समय पर ई-अटेंडेंस नहीं लगाने पर वेतन कटने का दबाव रहता है। इसी मजबूरी में शिक्षक ग्रामीणों की मदद लेते हैं। ग्रामीण ट्यूब के सहारे उन्हें नदी पार कराते हैं। स्कूल पहुंचने के बाद छुट्टी होने पर शिक्षक फिर नदी के किनारे ग्रामीणों का इंतजार करते हैं, ताकि उनकी मदद से वापस नदी पार कर सकें।

बारिश के मौसम में शिक्षकों के लिए परेशानी बनी ई-अटेंडेंस

बारिश के मौसम में यह समस्या करीब चार महीने तक बनी रहती है। बैसली नदी में पानी बढ़ने से नदरौली प्राथमिक विद्यालय, नदरौली माध्यमिक विद्यालय और सुमेर सिंह का पुरा माध्यमिक विद्यालय सहित आसपास के स्कूल प्रभावित होते हैं। वहीं, गांव पराए का पुरा में प्राथमिक विद्यालय होने के कारण वहां के बच्चों को माध्यमिक शिक्षा के लिए नदरौली माध्यमिक विद्यालय जाना पड़ता है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के सामने भी उफनती नदी और जलभराव वाले रास्ते को पार करने का खतरा बना रहता है।

बारिश की वजह से ग्रामीण भी हो रहे परेशान

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के चार महीनों में सड़क, पुल और आवागमन की सुविधा नहीं होने से उनका जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों और शिक्षकों को भी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। एक तरफ सरकार डिजिटल अटेंडेंस और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भिंड के इन गांवों में शिक्षक और बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए ट्यूब का सहारा लेने को मजबूर हैं।

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