नीतू परमार की भाजपा में वापसी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
बैतूल

कांग्रेस को बड़ा झटका! मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार की भाजपा में वापसी; हेमंत खंडेलवाल ने किया स्वागत

Multai News: नीतू परमार ने एक बार फिर BJP की सदस्यता ग्रहण कर ली है। बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में उन्होंने अपने पति प्रहलाद सिंह परमार के साथ पार्टी में वापसी की।

सजल रघुवंशी

Neetu Parmar Rejoins BJP Multai News: मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष नीतू परमार ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। बुधवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में उन्होंने अपने पति प्रहलाद सिंह परमार के साथ पार्टी में वापसी की।

इस अवसर पर मुलताई विधायक चंद्रशेखर देशमुख, भाजपा जिला अध्यक्ष सुधाकर पवार, जिला मंत्री वर्षा गढ़ेकर तथा नगर मंडल अध्यक्ष गणेश साहू सहित कई स्थानीय भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं ने नीतू परमार और उनके पति का अंगवस्त्र पहनाकर तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया।

हेमंत खंडेलवाल ने किया स्वागत

प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा की नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर विभिन्न वर्गों के लोग लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने नीतू परमार का भाजपा परिवार में स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके शामिल होने से संगठन को और अधिक मजबूती मिलेगी।

नीतू परमार ने भाजपा में की वापसी

नीतू परमार ने भारतीय जनता पार्टी में वापसी को लेकर कहा कि उनका परिवार लंबे समय से पार्टी से जुड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ परिस्थितियों के कारण उन्हें अलग राह अपनानी पड़ी थी लेकिन अब वह भाजपा की विचारधारा तथा केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रभावित होकर दोबारा पार्टी में शामिल हुई हैं। उन्होंने क्षेत्र के विकास और जनसेवा को प्राथमिकता बताते हुए संगठन को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। वहीं, भाजपा जिला मंत्री वर्षा गढ़ेकर ने भी उनकी वापसी का स्वागत किया।

2023 में जिला अदालत ने किया था चुनाव रद्द

नीतू परमार का राजनीतिक सफर काफी सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी और बाद में कांग्रेस के समर्थन से नगर पालिका अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुई थीं। इसके बाद उनके निर्वाचन को अदालत में चुनौती दी गई। जून 2023 में जिला अदालत ने उनका चुनाव रद्द कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की। लगभग तीन वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद अप्रैल 2026 में उच्च न्यायालय ने उन्हें राहत देते हुए दोबारा नगर पालिका अध्यक्ष पद पर बहाल करने का आदेश दिया।

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