Mental Health Support: हर साल 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे मनाया जाता है। साल 2024 से 2026 तक इसका वैश्विक थीम Changing the Narrative on Suicide है और इसका उद्देश्य आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुप्पी साधने की बजाय इस पर खुलकर बातचीत, समझ और सहयोग को बढ़ावा देना है।
किसी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान देखकर उसकी मेंटल हेल्थ का अंदाजा लगाना सही नहीं है। कई बार व्यक्ति अंदर से तनाव, अकेलेपन, निराशा या डिप्रेशन से जूझ रहा होता है। ऐसे में सिर्फ यह पूछना कि सब ठीक है? काफी नहीं होता। कभी-कभी ध्यान से सुनना और सही समय पर मदद पहुंचाना अधिक जरूरी होता है।
जो व्यक्ति पहले दोस्तों या परिवार के साथ समय बीताता था, वह अचानक अकेला रहने लगे, बातचीत कम कर दे या अपनी मनपसंद एक्टिविटी से दूर हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामाजिक दूरी मानसिक परेशानी का संकेत हो सकती है।
अगर कोई बार-बार कहे कि मुझसे कुछ नहीं होता, मैं सबके लिए बोझ हूं या अब कुछ अच्छा नहीं होगा, तो उसकी बात को सिर्फ नकारात्मक समझकर टालना नहीं चाहिए। NIMH के अनुसार खुद को बोझ मानना, बहुत ज्यादा अपराध बोध या शर्म महसूस करना और मरने की बात करना भी एक संकेत हो सकता है।
लंबे समय तक नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना, भूख में बदलाव, ऊर्जा की कमी और रोज के कामों में रुचि कम होना डिप्रेशन के लक्षण में शामिल हो सकते हैं। WHO के अनुसार डिप्रेशन का असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और काम करने की क्षमता पर भी पड़ता है।
लगातार उदासी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा या घुटन महसूस करना भी मानसिक तनाव का संकेत है। हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते, इसलिए व्यवहार में असामान्य बदलाव को समझने की कोशिश करना चाहिए।
अगर कोई सीधे या इशारों में जिंदगी खत्म करने या खुद को नुकसान पहुंचाने की बात करता है, तो इसे मजाक, अटेंशन या इमोशनल ड्रामा समझकर इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में किसी प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए।
कई बार हमें चिंता तो होती है, लेकिन समझ नहीं आता कि बातचीत कैसे शुरू करें। सीधे तौर पर बात करना सही नहीं लगता है। ऐसे समय में आप पूछ सकते हैं कि तुम कुछ समय से परेशान हो, क्या तुम मुझसे बात करना चाहोगे या कोई बात है, तो मुझसे शेयर कर सकते हो, मैं सुनूंगा। ऐसी बात इस बुरे समय में मरहम का काम कर सकती है।
किसी व्यक्ति से सीधे आत्महत्या के विचारों के बारे में पूछना थोड़ा अनकंफर्टेबल हो सकता है। इसके बजाय, खुलकर और संवेदनशीलता से पूछना बातचीत का रास्ता खोलता है। NIMH की सलाह में भी पूछना, साथ रहना, सुरक्षित रखना, मदद करना और संपर्क बनाए रखने जैसे सुझाव दिए गए हैं।
मानसिक तनाव से जूझ रहे व्यक्ति को अनजाने में कही गई कुछ बातें अकेला महसूस करा सकती हैं। इसलिए ये बातें कहने से बचें, जैसे- इतनी छोटी बात के लिए परेशान क्यों हो, तुलना करना, पॉजिटिव सोचो। सिर्फ सकारात्मक सोचने की सलाह देने से वो व्यक्ति खुद को ही दोषी समझ लेता है।
अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचा सकता है, तो उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत इमरजेंसी हेल्प लें। भारत में Tele-MANAS की 24x7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 या 1800-89-14416 पर संपर्क किया जा सकता है।