मौसम का पूर्वानुमान (सौ. एआई) 
लाइफस्टाइल

World Meteorological Day: क्यों फेल हो जाते हैं मौसम के अनुमान? बेकाबू होती प्रकृति को कैसे रोकेंगे वैज्ञानिक

Weather Prediction: आज के दौर में मौसम का सटीक अनुमान लगाना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। जलवायु परिवर्तन, तेजी से बदलते पर्यावरण और अनिश्चित प्राकृतिक घटनाओं आदि इसके कारण हैं।

प्रीति शर्मा

Climate Change Risks: मौसम का कोई पासपोर्ट नहीं होता और पानी की कोई सीमा नहीं होती। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की यह चेतावनी 2026 में और भी गंभीर हो गई है। तेजी से पिघलते ग्लेशियर और उबलते समुद्रों के बीच अब कोई भी देश अकेले प्रकृति की मार से नहीं बच सकता। सटीक भविष्यवाणी के लिए अब पूरी दुनिया को एक ग्लोबल ऑब्जर्वेशन नेटवर्क की जरूरत है।

आज हर आर्थिक निर्णय, बुनियादी ढांचे में निवेश, फसलों की बुवाई और स्वास्थ्य प्रबंधन योजना WMO के वैश्विक अवलोकन और पूर्वानुमान की रीढ़ पर टिकी है। लेकिन सच्चाई यह है कि वैश्विक अवलोकन प्रणाली में अभी भी बड़े गैप मौजूद हैं। जमीन, समुद्र और बर्फीले क्षेत्रों से मिलने वाले डेटा की कमी के कारण अक्सर मौसम के सटीक अनुमान फेल हो जाते हैं जिसका खामियाजा जान-माल के भारी नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है।

अरबों डॉलर और लाखों जानें

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार एक्सट्रीम मौसम को व्यापार जगत के नेताओं द्वारा शीर्ष दीर्घकालिक जोखिम के रूप में स्थान दिया गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 1970 से 2021 के बीच मौसम संबंधी आपदाओं ने वैश्विक स्तर पर 4.3 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान किया है और लगभग 20 लाख लोगों की जान ली है। साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है और पिछले 11 साल इतिहास के सबसे गर्म दशक के रूप में दर्ज किए गए हैं।

अर्ली वार्निंग

WMO का मानना है कि अर्ली वार्निंग यानी समय से पहले चेतावनी मिलना अब कोई लग्जरी नहीं बल्कि जीवन बचाने की अनिवार्यता है। विश्व बैंक के अनुसार यदि पूरी दुनिया को अर्ली वार्निंग सेवाओं तक पहुंच मिल जाए तो हर साल कम से कम 13 बिलियन डॉलर की संपत्ति के नुकसान और 22 बिलियन डॉलर की भलाई के नुकसान को रोका जा सकता है। महज 24 घंटे पहले मिली सटीक चेतावनी किसी तूफान या लू से होने वाले नुकसान को 30% तक कम कर सकती है।

वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल डे (सौ. फ्रीपिक)

वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चुनौती

बढ़ता तापमान न केवल हीटवेव को भड़का रहा है बल्कि अत्यधिक बारिश और तेजी से तीव्र होने वाले चक्रवातों को भी जन्म दे रहा है। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डेटा-शेयरिंग और आपसी विश्वास है। मौसम और जलवायु की खुफिया जानकारी ही हमारे समुदायों को बचाने का आधार है। WMO अब दुनिया भर के अवलोकन नेटवर्क के बीच के गैप को भरने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि पूर्वानुमानों की सटीकता और पहुंच को बेहतर बनाया जा सके।

भविष्य में निवेश

अवलोकन नेटवर्क को फंड देना करदाता के लिए कोई अतिरिक्त लागत नहीं है बल्कि यह आर्थिक सुरक्षा और जलवायु लचीलेपन में एक निवेश है। यह देशों और भावी पीढ़ियों के बीच एक सेतु की तरह काम करता है। समुद्र के बढ़ते स्तर और पिघलती बर्फ की निगरानी करना अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि ग्रीनहाउस गैसों का रिकॉर्ड स्तर आने वाली पीढ़ियों के लिए तापमान को और बढ़ाएगा।

WMO का यह संदेश साफ है कि आज की बारीकी से की गई निगरानी ही हमारे कल की सुरक्षा कर सकती है। मौसम की कोई सरहद नहीं होती इसलिए इससे लड़ने के लिए वैश्विक सहयोग ही एकमात्र रास्ता है। बेकाबू होती प्रकृति को रोकने के लिए विज्ञान और डेटा का सही तालमेल ही मानवता की अगली ढाल बनेगा।

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