वीगन और क्रुएल्टी-फ्री कॉस्मेटिक्स का मतलब एक जैसा नहीं होता।
लिपस्टिक, मस्कारा और मॉइस्चराइजर में कुछ एनिमल बेस्ड इंग्रेडिएंट्स हो सकते हैं।
मेकअप खरीदते समय इंग्रेडिएंट लिस्ट और सर्टिफिकेशन जरूर चेक करें।
World Vegan Day: मेकअप करना तो सबको पसंद है, लेकिन कई लोग वीगन मेकअप चाहते हैं। आपने भी बाजार में वीगन ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बारे में जरूर सुना होगा। आजकल कई ब्रांड लिपस्टिक, फाउंडेशन, मस्कारा और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के वीगन ऑप्शन भी बाजार में ला रहे हैं।
दरअसल, वीगन मेकअप ऐसे कॉस्मेटिक्स को कहा जाता है, जिसके मैन्युफैक्चरिंग में एनिमल प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है यानी इन प्रोडक्ट्स में शहद, बीवैक्स, लैनोलिन, कैरमाइन और एनिमल बेस्ड कोलेजिन जैसी सामग्री नहीं होती है। इनकी जगह प्लांट-बेस्ड या सिंथेटिक ऑप्शन इस्तेमाल किए जाते हैं।
अक्सर लोग वीगन और क्रुएल्टी-फ्री मेकअप को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों के मायने अलग हैं। वीगन का मतलब प्रोडक्ट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से है, जबकि क्रुएल्टी-फ्री का संबंध जानवरों पर होने वाले परीक्षण से है।
आसान भाषा में समझें, तो किसी लिपस्टिक में बीवैक्स का इस्तेमाल हुआ है, लेकिन उसके निर्माण या परीक्षण में जानवरों का इस्तेमाल नहीं किया गया है, तो वह क्रुएल्टी-फ्री मेकअप कहा जाएगा, लेकिन वीगन नहीं। दूसरी ओर, किसी प्रोडक्ट में एनिमल बेस्ड सामग्री नहीं है, लेकिन उसके परीक्षण में जानवरों का इस्तेमाल किया गया है, तो वह वीगन प्रोडक्ट तो होगा, क्रुएल्टी-फ्री नहीं होगा।
मेकअप खरीदते समय सिर्फ पैकेजिंग पर लिखे वीगन या क्रुएलिटी फ्री जैसे शब्दों पर भरोसा न करें। उसकी पूरी इंग्रेडिएंट लिस्ट और ब्रांड की जानकारी भी देखें। कई बार एक जैसे नाम वाले इंग्रेडिएंट्स के सोर्स अलग-अलग होते हैं।
लिपस्टिक में इस्तेमाल होने वाला कैरमाइन लाल रंग देने वाला पिगमेंट है, जो कोचीनियल कीड़ों से प्राप्त होता है। वहीं, बीवैक्स मधुमक्खियों से मिलता है। अगर आप वीगन लिपस्टिक खरीदना चाहती हैं, तो इनकी जगह इस्तेमाल किए गए प्लांट-बेस्ड या सिंथेटिक ऑप्शन की जानकारी होनी चाहिए।
कुछ मस्कारा में बीवैक्स और अन्य एनिमल बेस्ड वैक्स का इस्तेमाल किया जाता है। वीगन मस्कारा चुनते समय इसकी सामग्री जरूर जांचें। ऐसे विकल्प भी उपलब्ध हैं जिनमें प्लांट बेस्ड या सिंथेटिक वैक्स का इस्तेमाल होता है।
त्वचा को मुलायम बनाने के लिए कुछ मॉइस्चराइजर में लैनोलिन का इस्तेमाल किया जाता है। यह भेड़ की ऊन से प्राप्त होता है। अगर आप वीगन विकल्प चाहते हैं, तो इसकी जगह प्लांट-बेस्ड ऑयल और बटर वाले प्रोडक्ट्स का चुनाव कर सकते हैं।
कई एंटी-एजिंग क्रीम में कोलेजिन और इलास्टिन जैसे इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल किया जाता है। इनका सोर्स जानना जरूरी है, क्योंकि कुछ कोलेजिन एनिमल बेस्ड होते हैं। वीगन ऑप्शन में प्लांट-बेस्ड या बायोटेक्नोलॉजी से तैयार सामग्री इस्तेमाल की जाती है।
प्रोडक्ट खरीदते समय पैकेजिंग पर मौजूद सर्टिफिकेशन और लोगो को ध्यान से देखें। वीगन सोसायटी जैसे संगठनों के सर्टिफिकेशन से प्रोडक्ट के वीगन होने का प्रमाण मिलता है। इसी तरह लीपिंग बनी (Leaping Bunny) जैसे प्रमाणन क्रुएल्टी-फ्री दावों की जांच में मदद करते हैं। संबंधित संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी पुष्टि की जा सकती है।
किसी ब्रांड के क्रुएल्टी-फ्री होने का दावा जांचने के लिए उसकी आधिकारिक एनिमल टेस्टिंग पॉलिसी पढ़ें। यह भी देखें कि कंपनी अपने तैयार प्रोडक्ट्स के साथ-साथ इंग्रेडिएंट्स की टेस्टिंग को लेकर क्या जानकारी देती है। सिर्फ किसी एक प्रोडक्ट पर लिखे दावे से पूरे ब्रांड की नीति का अंदाजा न लगाएं।
वीगन मेकअप चुनने का मतलब यह नहीं है कि वह हर तरह की त्वचा के लिए बेहतर या पूरी तरह सुरक्षित होगा। वीगन प्रोडक्ट्स में भी ऐसे इंग्रेडिएंट्स हो सकते हैं, जो कुछ लोगों की त्वचा पर जलन या एलर्जी पैदा करें। इसलिए अपनी स्किन टाइप के अनुसार प्रोडक्ट चुनें, उसकी एक्सपायरी डेट जांचें और नया प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।