Squats Benefits: स्क्वाट सबसे आसान और असरदार बॉडीवेट एक्सरसाइज में से एक है। इसकी खास बात यह है कि इसे करने के लिए जिम या किसी खास इक्विपमेंट की जरूरत नहीं होती। नियमित और सही तकनीक से किए गए स्क्वाट पैरों और ग्लूट्स को मजबूत बनाते हैं और शरीर की स्थिरता और मोबिलिटी को बेहतर करने में मदद करते हैं। लेकिन हर स्क्वाट का शरीर पर एक जैसा असर नहीं होता। बुल्गैरियन स्क्वाट, रोमानियन स्क्वाट और गोबलेट स्क्वाट जैसी अलग-अलग वैरिएशन को अपने फिटनेस गोल के अनुसार शामिल किया जा सकता है।
स्क्वाट मुख्य रूप से पैर के क्वाड्रिसेप्स, ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग्स के हिस्से को एक्टिव करता है। नियमित अभ्यास से लोअर बॉडी की ताकत और मसल्स बेहतर होती है। यही वजह है कि स्क्वाट को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की बेसिक एक्सरसाइज माना जाता है।
अगर आप सामान्य स्क्वाट से आगे बढ़ना चाहते हैं, तो बुल्गैरियन स्क्वाट एक सिंगल-लेग एक्सरसाइज है, जिसमें ग्लूट्स और क्वाड्रिसेप्स टारगेट होता है और पैरों के बीच स्ट्रेंथ इमबैलेंस पर भी काम करता है। अकसर रोमानियन स्क्वाट और रोमानियन डेडलिफ्ट को एक ही समझा जाता है। रोमानियन स्क्वाट मुख्य रूप से हैमस्ट्रिंग्स और ग्लूट्स को टारगेट करता है। वहीं गोबलेट स्क्वाट में डंबल या केटलबेल को छाती के सामने पकड़कर स्क्वाट किया जाता है, जिससे सही पॉश्चर बनाए रखने और स्क्वाट की टेक्निक सीखने में मदद मिलती है। इन वैरिएशंस को अपनी क्षमता और टारगेट के अनुसार वर्कआउट में शामिल करना चाहिए।
स्क्वाट सिर्फ पैरों की एक्सरसाइज नहीं है। शरीर को स्थिर रखने के लिए पेट और लोअर बैक के मसल्स पर भी काम करती हैं। इससे कोर स्टेबिलिटी और शरीर का बैलेंस बेहतर होता है।
सही तकनीक और अपनी क्षमता के अनुसार स्क्वाट करने से हिप, घुटने और एंकल की मूवमेंट बेहतर होती है। इसका फायदा रोजमर्रा के काम जैसे कुर्सी से उठने, सीढ़ियां चढ़ने और नीचे बैठने में भी मिलता है। इससे झुकना, उठना-बैठना या रोजमर्रा के किसी भी काम को करना आसान हो जाता है।
अगर आप हर दिन बहुत ज्यादा रेप्स, हैवी वेट या हाई-इंटेंसिटी स्क्वाट करते हैं और शरीर को पर्याप्त रिकवरी का वक्त नहीं देते, तो थकान बढ़ सकती है। खराब फॉर्म भी चोट का कारण बन सकती है। इसलिए रोज स्क्वाट करना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन हर दिन एक जैसा वर्कआउट नहीं करना चाहिए। शरीर को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ पर्याप्त रिकवरी देना जरूरी है।
स्क्वाट करते समय पैरों को स्थिर रखें, घुटनों को पैरों की दिशा में रखें और उतना ही डीप जाएं, जितनी आपकी शरीर की क्षमता है और जितना आप बिना दर्द और नियंत्रण के साथ कर सकें। सिर्फ ज्यादा रेप्स पूरे करने के बजाय फॉर्म और कंट्रोल पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।