Overthinking Control Tips: ओवरथिंकिंग, एक ऐसी बीमारी है जो आपके ब्रेन के साथ इमोशनल और फिजिकल हेल्थ को भी नुकसान पहुंचा सकती है। 81% भारतीय इसकी चपेट में हैं। एक संस्था द्वारा की गई रिसर्च से पता चलता है कि ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना भारतीयों की आदत बनती जा रही है।
ओवरथिंकिंग एक सामान्य समस्या बन गई है, जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। जब लोग रात के समय सोने जाते हैं, तो अकसर दिनभर हुई बातों को या जिस बात से उन्हें तकलीफ पहुंची हो, ऐसी चीजों के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं, जिससे उनकी नींद डिस्टर्ब हो जाती है। ओवरथिंकिंग की समस्या में दिमाग अपने आप समस्या के सवाल और जवाब बनाने लगता है, जिसके कारण तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्या होने लगती है।
ओवरथिंकिंग से बचने का सबसे अच्छा तरीका है खुद पर विश्वास रखना। आप अपने ऊपर और अपने फैसलों पर भरोसा करें। आप क्या चाहते हैं, आपके अनुसार कोई चीज ठीक है या नहीं इस बात पर ध्यान दें। अपनी खुशी को प्राथमिकता दें और दुनिया क्या सोचेगी इस बारे में थोड़ा कम सोचें। अपने फैसलों पर अटल रहें और बार-बार उसे रिचेक करने की कोशिश न करें।
सोशल मीडिया के जमाने में हम हर चीज को सोशल करना पसंद करते हैं। हर चीज को सोशल करने की स्थिति को लेकर असमंजस में बने रहते हैं, तो ऐसी एंग्जायटी से बचना चाहिए। आपको तय करना होगा कि आपको दुनिया को सब कुछ दिखाना है या फिर कुछ चीजों को निजी जीवन में ही बनाए रखना है। जिस दिन आप यह तय करेंगे आप ओवरथिंकिंग से बच जाएंगे।
ज्यादातर लोग आगे की बातों को लेकर ओवरथिंकिंग करते हैं। कल क्या होगा, इसकी चिंता में लोग आज परेशान रहते हैं। ऐसे में अगर आप आज में जीना सीख लें, तो आपको कल की चिंता नहीं सताएगी और न ही आगे क्या होगा, इस डर से आप तनाव में रहेंगे।
सुप्त बद्ध कोणासन के अभ्यास से ध्यान केंद्रि करने में मदद मिलती है, जिससे ओवरथिंकिंग को कम करना आसान हो जाता है। यह आसन मानसिक तनाव को नियंत्रित करने में मदद करता है। सोने से पहले इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति अपने विचारों को नियंत्रित कर सकता है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से नींद की क्वालिटी में भी सुधार होता है और अच्छी नींद से ओवरथिंकिंग को कम होता है। जिन लोगों को ओवरथिंकिंग के कारण अनिद्रा की शिकायत हो जाती है, उनके लिए सुप्त बद्ध कोणासन का अभ्यास बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम की एक प्रभावी विधि है, जो मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक होती है। जिन लोगों को ओवरथिंकिंग की समस्या होती है, उनके लिए रोजाना नाड़ी शोधन का अभ्यास लाभकारी हो सकता है। नाड़ी शोधन का अभ्यास करने से मन शांत होता है और फोकस बढ़ता है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और फेफड़े भी स्वस्थ रहते हैं। इसके साथ ही नाड़ी शोधन का अभ्यास डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है।