मद्रास चेक्स( फोटो.सोशल मीडिया)  
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Story Of Madras Checks: तमिलनाडु की गलियों से Dior-Gucci के रनवे तक, जानिए मद्रास चेक्स की दिलचस्प कहानी

History Of Madras Checks: मद्रास चेक्स को आपने सिर्फ रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला साधारण कपड़े के तौर पर देखा होगा। यह अमेरिका के Ivy League कॉलेज की फैशन का पहचान बन गया और अब DIOR!

रीता राय सागर

History Of Madras Checks Fabric: हल्की बनावट और सहज खूबसूरती वाला मद्रास चेक्स पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली लुंगी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। आज कई मशहूर फैशन डिजाइनर इस पारंपरिक टेक्सटाइल को अपने नए कलेक्शन में शामिल कर रहे हैं। लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि इस खूबसूरत कपड़े को बुनने वाले हैंडलूम बुनकर समुदाय अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मद्रास चेक्स कपड़ा 1950 के दशक के अमेरिकी एलीट क्लास द्वारा अपनाया गया था और तब से यह अमीर वर्ग की वेशभूषा का एक अभिन्न हिस्सा बन गया।

मद्रास चेक्स का इतिहास

ईस्ट इंडिया कंपनी ने मद्रास को उसके हथकरघा कपड़ों के कारण चुना। जब डच 1612 में मद्रासपट्टिनम पहुंचे, तो उन्होंने कैलिको कपड़े का व्यापार शुरू किया और इससे इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। 17वीं शताब्दी के मध्य में, मद्रास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए एक व्यापारिक केंद्र बन गया। कंपनी के फ्रांसिस डे ने हाथ से बुने और वनस्पति रंगों से रंगे कपड़े में संभावनाएं देखीं और बुनकरों को निर्यात के लिए हल्के कपड़े का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन दिया। उन्होंने भारतीय बुनकरों को 30 वर्षों के लिए कर से छूट प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 400 बुनकर मद्रास में बस गए।

चेकदार कपड़ा आमतौर पर लाल, हरे और नीले रंगों में ही मिलता था। चूंकि इन्हें नील और हल्दी जैसे प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता था, इसलिए रंग स्थायी नहीं होते थे और हर बार धोने पर रंग अलग दिखाई देते थे, इसी कारण इसका नाम ब्लीडिंग मद्रास पड़ा।

मद्रास चेक्स( फोटो.सोशल मीडिया)

क्या है मद्रास चेक्स?

मद्रास चेक्स एक हल्का, ब्रीदेबल सूती कपड़ा है, जिसकी पहचान इसके रंग-बिरंगे चेक पैटर्न से होती है। इसका नाम मद्रास के नाम पर पड़ा। 16वीं शताब्दी के बाद इसे दुनिया के कई देशों में निर्यात किया जाने लगा। शुरुआत में इसे हाथ करघे पर प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता था।

साधारण लुंगी से दुनिया के फैशन तक

एक समय मद्रास चेक्स दक्षिण भारत में लुंगी के रूप में आम लोगों द्वारा पहना जाता था। लेकिन यूरोपीय व्यापारियों को इसकी खूबसूरती और हल्कापन पसंद आया और इसे यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका तक पहुंचाया। बाद में यह अमेरिकी आईवी लीग फैशन का हिस्सा बन गया और ब्लीडिंग मद्रास के नाम से मशहूर हुआ, क्योंकि इसके प्राकृतिक रंग हर धुलाई के बाद हल्के-हल्के बदलते थे।

मद्रास चेक्स( फोटो.सोशल मीडिया)

Dior जैसे कई बड़े फैशन ब्रांड्स की पसंद

आज यह सिर्फ एक पारंपरिक कपड़ा नहीं रहा। Dior, Ralph Lauren, Gucci जैसे कई अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड्स अपने कलेक्शन में इस पैटर्न का इस्तेमाल कर चुके हैं। डिजाइनर्स इसे आधुनिक अंदाज में शर्ट, ड्रेस, स्कर्ट, जैकेट और एक्सेसरीज में शामिल कर रहे हैं।

बुनकरों के सामने अस्तित्व का संकट

जहां एक ओर मद्रास चेक्स वर्ल्ड फैशन में नई पहचान बना रहा है, वहीं इसे तैयार करने वाले पारंपरिक बुनकर कठिन दौर से गुजर रहे हैं। पावरलूम, मशीन से बने कपड़ों और बदलते फैशन ट्रेंड के कारण हाथकरघा उद्योग प्रभावित हो रहा है। प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीक से बुनाई करने वाले कारीगरों की संख्या में भी गिरावट आई है।

मद्रास चेक्स( फोटो.सोशल मीडिया)

क्यों खास है मद्रास चेक्स?

  • हल्का और सांस लेने योग्य सूती कपड़ा
  • गर्म और आर्द्र मौसम के लिए उपयुक्त
  • हाथकरघे पर तैयार होने की समृद्ध परंपरा
  • रंग-बिरंगे चेक पैटर्न इसकी खास पहचान
  • भारतीय हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
  • आज भी ग्लोबल फैशन इंडस्ट्री में लोकप्रिय

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