Loofah Skin Care: भारतीय घरों में नहाते समय लूफा, बाथ स्क्रबर या शरीर रगड़ने वाले नेचुरल फाइबर का इस्तेमाल आम है। इससे बॉडी पर मौजूद डेड स्किन निकल जाता है और त्वचा साफ महसूस होती है, लेकिन क्या रोजाना लूफा से त्वचा को रगड़ना वास्तव में जरूरी है?
विशेषज्ञ के सलाह के मुताबिक, लूफा की बनावट और उसे गीली जगह पर रखने की आदत बैक्टीरिया के बढ़ने का कारण बनती है।
लूफा की सतह में कई छोटे-छोटे छेद और दरारें होती हैं, जहां पानी, साबुन और त्वचा की मृत कोशिकाएं फंस सकती हैं। इसके अलावा बाथरूम की नमी लूफा को लंबे समय तक गीला रखती है। यही वातावरण बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि लूफा इस्तेमाल करते ही स्किन इंफेक्शन हो जाएगी। स्वस्थ और बिना कटी-फटी त्वचा पर शरीर की बाहरी परत बैक्टीरिया से सुरक्षा देती है। लेकिन अगर त्वचा पर कट, खरोंच या घाव है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
लूफा से बहुत जोर लगाकर शरीर रगड़ने पर त्वचा में जलन, लालिमा और छोटे-छोटे घाव हो सकते हैं। अत्यधिक रगड़ से त्वचा को नुकसान और कुछ मामलों में दाग पड़ने की समस्या भी हो सकती है। इसलिए नहाते समय त्वचा को साफ करने के लिए जोर से रगड़ना जरूरी नहीं है।
भारतीय परंपरा में स्नान और शरीर की स्वच्छता का विशेष महत्व रहा है। आयुर्वेद में त्वचा की देखभाल के लिए अभ्यंगा यानी तेल मालिश और विभिन्न प्रकार के लेप का उल्लेख मिलता है। आयुष मंत्रालय के आयुषॉफ्ट में भी त्वचा संबंधी प्रक्रियाओं में लेप और उसके बाद गुनगुने पानी से साफ करने का वर्णन मिलता है।
हर इस्तेमाल के बाद पूरी तरह सुखाएं। गीला लूफा को लगातार बाथरूम की नमी में न छोड़ें। इसे पूरी तरह सूखने देने की सलाह देते हैं।
इसे समय-समय पर बदलते रहें। लूफा को लगभग हर महीने बदलना चाहिए।
त्वचा पर जोर न लगाएं। अगर रगड़ने के बाद त्वचा लाल, दर्दनाक या जलन वाली हो रही है, तो इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।