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International Stuttering Awareness Day: बच्चा हकलाता है तो उसकी बात पूरी न करें, इन 6 बातों का रखें ध्यान

Stuttering In Children: बच्चा बोलते समय अटकता है या शब्द दोहराता है, तो जल्दी बोलने के लिए न कहें। जानिए, हकलाने वाले बच्चे से बातचीत करते समय माता-पिता और शिक्षकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

रीता राय सागर

Highlights:

  • बच्चे की बात बीच में काटकर उसके शब्द या वाक्य पूरे न करें।

  • धीरे बोलो या पहले सोचकर बोलो- जैसी बातें बच्चे से कहने से बचें।

  • हकलाहट बनी रहे या बच्चा परेशान हो, तो स्पीच-लैंग्वेज थेरेपिस्ट से सलाह लें।

Parenting Tips For Stuttering Child: कई बार बच्चा बोलते समय किसी शब्द पर अटक जाता है या एक ही आवाज को बार-बार दोहराता है। ऐसे में आमतौर माता-पिता मदद करने की नीयत से उसका वाक्य पूरा कर देते हैं। लेकिन इससे बच्चे को अपनी बात कहने के लिए जरूरी समय नहीं मिल पाता। इसलिए उसकी बात खुद से पूरी होने का इंतजार करें। बीच में टोकने या उसके मन की बात का अंदाजा लगाकर जवाब देने के बजाय उसे खुद बोलने दें।

बच्चे से बात करते समय इन 6 बातों का ध्यान रखें

धैर्य से सुनें: बच्चा बोल रहा हो, तो अपना ध्यान उसकी बात पर रखें। उसे यह महसूस होना चाहिए कि आप उसके शब्दों को समझने में रुचि रखते हैं, न कि इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि वह कैसे बोल रहा है।

बार-बार जल्दी बोलने को न कहें: धीरे बोलो, आराम से बोलो या पहले सोचो, फिर बोलो जैसी बातें इस तरह के बच्चों से बोलने से बचें। इनसे बच्चे को अपनी बोलने की शैली को लेकर अतिरिक्त दबाव महसूस होता है।

आई कॉन्टैक्ट बनाए रखें: बच्चा अटककर बोल रहा हो, तब भी सामान्य तरीके से उसकी ओर देखें। चेहरे पर परेशानी या अधीरता दिखाने के बजाय नॉर्मल बिहेव करें।

अपनी बातचीत की गति थोड़ी धीमी रखें: बच्चे से बात करते समय जल्दबाजी न करें। सवाल पूछने और उसके जवाब देने के बीच थोड़ा समय दें। इससे बातचीत का माहौल सहज बना रहेगा।

उसे बोलने का मौका दें: परिवार की बातचीत और स्कूल की गतिविधियों में बच्चे को भी अपनी बात रखने का अवसर दें। उसकी जगह खुद जवाब न दें और न ही हकलाने के कारण उसे दूसरों से अलग रखें।

मजाक या तुलना न करें: बच्चे की नकल उतारना, दूसरे बच्चों से तुलना करना या उसके बोलने पर बार-बार टिप्पणी करना उसे असहज कर सकता है। उसे अपनी बात कहने के लिए सुरक्षित और को-ऑपरेटिव माहौल दें।

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

हर बच्चे में बोलने का विकास एक जैसा नहीं होता। लेकिन अगर हकलाहट लगातार बनी रहे, बच्चा बोलने से बचने लगे, इस वजह से बच्चा भी परेशान हो या माता-पिता को चिंता हो, तो पीडियाट्रिशियन या स्पीच-लैंग्वेज थेरेपिस्ट से सलाह लें।

इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे

हर साल 22 अक्टूबर को इंटरनेशनल स्टटरिंग अवेयरनेस डे (International Stuttering Awareness Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हकलाने के बारे में जागरूकता बढ़ाना और हकलाने वाले लोगों के प्रति समझ को प्रोत्साहित करना है। 2026 के लिए आज के दिन की थीम- Shades of Stuttering – What’s Yours? है।

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