खिड़की के शीशे से छनकर आने वाली धूप विटामिन D बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होती।
खानपान, त्वचा का रंग और घर के अंदर ज्यादा समय बिताना भी इसकी कमी की वजह हो सकती हैं।
विटामिन D की कमी का पता लगाने के लिए 25 ओएच विटामिन डी (25-OH Vitamin D) ब्लड टेस्ट किया जाता है।
Vitamin D Deficiency Causes: आज 2 नवंबर को विटामिन डी डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को विटामिन D की कमी और शरीर को मिलने वाले फायदे के बारे में जागरूक करना है। विटामिन D हड्डियों को मजबूत रखने के साथ-साथ शरीर में कैल्शियम के अब्जॉर्बशन में मदद करता है। यह मांसपेशियों और इम्यून सिस्टम के फंक्शनिंग के लिए भी जरूरी है।
कहा जाता है कि रोज कुछ देर धूप में बैठने से शरीर को पर्याप्त विटामिन D मिल जाता है। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता। अगर आप भी सुबह खिड़की के पास बैठकर धूप सेंकते हैं या बालकनी में कुछ देर समय बिताती हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि शरीर में विटामिन D बनने की प्रक्रिया किन बातों पर निर्भर करती है।
धूप में मौजूद यूवीबी किरणें त्वचा में विटामिन D बनने की प्रक्रिया को शुरू करती हैं। लेकिन खिड़की का शीशा इन किरणों को रोक देता है। इसलिए बंद खिड़की के पास बैठकर धूप लेने से शरीर में पर्याप्त विटामिन D नहीं बनता। इसके लिए बाहर प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना जरूरी है।
अगर बाहर जाने पर शरीर का ज्यादातर हिस्सा कपड़ों से ढका रहता है, तो त्वचा को मिलने वाली धूप की मात्रा कम हो सकती है। शरीर में विटामिन D बनने की प्रक्रिया त्वचा के सीधे संपर्क पर निर्भर करती है।
वर्क फ्रॉम होम, लंबे समय तक ऑफिस में रहना या बाहर कम निकलना भी विटामिन D की कमी को बढ़ाता है। जिन लोगों को नियमित रूप से प्राकृतिक धूप नहीं मिलती, उन्हें इस पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
त्वचा में मौजूद मेलेनिन प्राकृतिक रूप से यूवी किरणों से सुरक्षा देता है। गहरे रंग की त्वचा में मेलेनिन की मात्रा ज्यादा होती है, जिसकी वजह से समान मात्रा में धूप मिलने पर विटामिन D बनने की प्रक्रिया कुछ कम हो जाती है। इसलिए त्वचा के रंग के साथ धूप में रहना भी अहम है।
बहुत कम खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से विटामिन D पाया जाता है। अगर आपकी डाइट में विटामिन डी रिच फूड शामिल नहीं हैं और धूप भी पर्याप्त नहीं मिलती, तो विटामिन डी की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। इसके लिए डाइट में शामिल कर सकते हैं:
अंडे की जर्दी
फैटी फिश जैसे सैल्मन और टूना
विटामिन D से फोर्टिफाइड दूध
यूवी ट्रीटेड मशरूम
शुरुआत में विटामिन D की कमी के कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। कमी ज्यादा होने पर हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी या दर्द और थकान महसूस होती है।
विटामिन D लेवल जानने के लिए डॉक्टर 25-हाइड्रोक्सी विटामिन डी यानी 25(OH)D ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं। यह टेस्ट शरीर में विटामिन D की स्थिति का आकलन करने का मुख्य तरीका है। हर व्यक्ति को बिना वजह यह टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर उम्र, लक्षण, खानपान और कमी को देखते हुए जांच की सलाह देते हैं।
विटामिन D फैट में घुलने वाला विटामिन है। इसकी जरूरत से ज्यादा मात्रा लंबे समय तक लेने से शरीर में कैल्शियम बढ़ सकता है और किडनी समेत दूसरे अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के हाई-डोज विटामिन D कैप्सूल या सैशे लेना सही नहीं है।