ब्रेस्ट कैंसर की पहचान (सौ.सोशल मीडिया) 
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मेडिकल साइंस का कमाल! ब्रेस्ट कैंसर की पहचान के लिए बनाई ये मशीन, ग्रामीण महिलाओं को मिलेगी मदद

मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के आईआईटी संस्थान ने हाल ही में कमाल कर दिखाया है। जहां पर ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाने के लिए सबसे छोटा और किफायती उपकरण विकसित किया है। इसकी मदद से कैंसर की इस गंभीर बीमारी को तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

दीपिका पाल

इंदौर: मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के आईआईटी संस्थान ने हाल ही में कमाल कर दिखाया है। जहां पर ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाने के लिए सबसे छोटा और किफायती उपकरण विकसित किया है। इसकी मदद से कैंसर की इस गंभीर बीमारी को तुरंत पता लगाया जा सकेगा। इस उपकरण को तैयार करने का कारण ग्रामीण इलाके की महिलाओं के लिए सकारात्मक कदम है। इस खास अविष्कार की जानकारी आईआईटी इंदौर के एक अधिकारी ने बुधवार को दी है।

शुरुआती लक्षणों की करेगा जांच

आपको बताते चलें कि, इस ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने वाले उपकरण को दरअसल आईआईटी इंदौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर श्रीवत्सन वासुदेवन का विकसित किया गया है। जो स्तन कैंसर के मरीजों के शुरुआती लक्षणों की जांच करता हैं। इसके अलावा ‘‘फोटोएकाउस्टिक स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्स'' के सिद्धांत पर आधारित उपकरण मानव शरीर के ऊतकों में असामान्य परिवर्तनों का पता लगाने के लिए ‘‘ऑप्टिकल'' और ‘‘एकाउस्टिक'' सिग्नल को एक साथ जोड़ता है।

जानें उपकरण से किन्हें मिलेगा फायदा

बताया जा रहा है कि, आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, "बीमारियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एमआरआई और सीटी स्कैनर आमतौर पर आयातित और महंगे होते हैं। इससे वे देश की आबादी के बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर हो जाते हैं।'' उन्होंने बताया कि इस चुनौती से निपटने के लिए आईआईटी इंदौर ने स्वदेशी तकनीक से किफायती उपकरण विकसित किया है ताकि खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों में कैंसर का वक्त रहते पता लगाकर उनकी जान बचाने में मदद मिल सके।

जानिए क्या हैं उपकरण में खासियत

प्रोफेसर वासुदेवन ने कहा कि यह उपकरण प्रकाश उत्पन्न करने के लिए ‘‘कॉम्पैक्ट पल्स्ड लेजर डायोड'' का उपयोग करता है जो ऊतक के संपर्क में आता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से मिले परिणामों का विश्लेषण करके उपकरण पता लगाता है कि कहीं संबंधित ऊतक कैंसरग्रस्त तो नहीं है।

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