Health Risks of Old Pillows: हम अक्सर अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए खान-पान और कसरत पर ध्यान देते हैं। अच्छी नींद के लिए हम महंगे गद्दे और शांत कमरे का चुनाव भी करते हैं लेकिन एक छोटी सी चीज जिसे हम सबसे ज्यादा नजरअंदाज करते हैं वह है हमारा तकिया। वैज्ञानिक रिसर्च और एक्सपर्ट के अनुसार एक गलत या पुराना तकिया न केवल आपकी नींद की गुणवत्ता को खराब करता है बल्कि यह गर्दन, सिर दर्द और सांस की बीमारियों की सबसे बड़ी वजह बन सकता है।
मानव शरीर की बनावट ऐसी है कि सोते समय रीढ़ की हड्डी और गर्दन का एक सीधी रेखा में होना अनिवार्य है। जब तकिया पुराना हो जाता है तो वह अपना आकार और सपोर्ट खो देता है। यदि तकिया बहुत अधिक ऊंचा या बहुत पतला हो तो गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही कारण है कि बहुत से लोग सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न, कंधों में खिंचाव या सिर दर्द की शिकायत करते हैं। सही ऊंचाई वाला तकिया मांसपेशियों को आराम देता है और शरीर के पोश्चर को बिगड़ने से बचाता है।
पुराना तकिया केवल शारीरिक दर्द ही नहीं बल्कि एलर्जी का भी घर होता है। समय के साथ तकिए के रेशों में पसीना, मृत त्वचा, और धूल जमा होने लगती है। रिसर्च के अनुसार ये चीजें डस्ट माइट्स को आकर्षित करती हैं। ये छोटे जीव नग्न आंखों से नहीं दिखते लेकिन ये अस्थमा, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी एलर्जी को ट्रिगर कर सकते हैं। भले ही आप कवर को कितना भी साफ रखें लेकिन तकिए के अंदरूनी हिस्से में जमा गंदगी पूरी तरह साफ नहीं हो पाती।
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विशेषज्ञों का मानना है कि हर दो से तीन साल में तकिया बदल देना चाहिए लेकिन यह आपके तकिए के मटेरियल पर भी निर्भर करता है।
तकिए की उम्र बढ़ाने के लिए उसे समय-समय पर धोना जरूरी है लेकिन ध्यान रहे कि हर मटेरियल पानी के लिए नहीं बना होता। मेमोरी फोम या लेटेक्स को कभी भी मशीन में न धोएं इसके बजाय केवल उनके कवर को नियमित रूप से बदलें। सिंथेटिक तकियों को निर्देशानुसार धोया जा सकता है ताकि बैक्टीरिया और धूल के कणों को कम किया जा सके।
एक छोटा सा बदलाव आपकी सेहत और नींद को कई गुना बेहतर बना सकता है। यदि आपका तकिया मोड़ने पर वापस अपने आकार में नहीं आ रहा है तो समझ लीजिए कि अब इसे अलविदा कहने का समय आ गया है।