Senior Citizen Nutritious Diet: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की जरूरतें बदलने लगती हैं। ऐसे में कई बुजुर्ग पहले की तुलना में खाना कम खाने लगते हैं। कभी भूख कम लगती है, कभी दांतों का कमजोर होना या निगलने की समस्या के कारण खाना कम हो जाता है। कई बार बीमारी या दवाओं के असर से भी भूख कम होने लगती है। ऐसे में अगर रोज की थाली सिर्फ चाय-बिस्कुट, खिचड़ी या एक रोटी-सब्जी तक सीमित हो जाए तो शरीर को पर्याप्त पोषण मिलना मुश्किल हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि उम्र बढ़ने पर शारीरिक गतिविधि और ऊर्जा की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन शरीर के लिए पर्याप्त पोषक तत्व और प्रोटीन जरूरी होता है।
उम्र के साथ शरीर में मांसपेशियों की मात्रा कम होने लगती है। अगर खाना भी कम हो जाए और प्रोटीन पर्याप्त न मिले तो कमजोरी और मांसपेशियों में कमी होने लगती है। WHO के अनुसार बुजुर्गों में कम प्रोटीन का सेवन मांसपेशियों की कमजोरी, हड्डियों से जुड़ी समस्या और इम्यून सिस्टम पर असर डालता है। इसलिए बुजुर्गों की थाली में सिर्फ पेट भरने वाला खाना नहीं, बल्कि प्रोटीन से भरपूर भोजन होना जरूरी है।
स्वस्थ बुजुर्ग के शरीर में प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से करीब 1.0-1.2 ग्राम प्रोटीन रोजाना लेने की सलाह दी गई है। बीमारी, चोट या वजन कम होने के बाद कुछ लोगों को 1.5 ग्राम प्रति किलो तक हो सकती है। किडनी की बीमारी वाले व्यक्ति बिना चिकित्सकीय सलाह के ज्यादा प्रोटीन न लें।
उदाहरण के लिए, 60 किलो वजन वाले स्वस्थ बुजुर्ग के लिए यह करीब 60–72 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन हो सकता है। यह एक सामान्य मार्गदर्शक मात्रा है, हर व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है।
बुजुर्गों के लिए एक साथ बहुत ज्यादा खाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में पूरे दिन के भोजन में प्रोटीन को थोड़ा-थोड़ा बांटना प्रोटीन लेने का आसान तरीका है। नाश्ते में दूध, दही, पनीर या अंडा लिया जा सकता है। दोपहर में दाल, राजमा, चना, सोया या पनीर को शामिल करें। शाम के नाश्ते में दही, दूध या मुट्ठी भर नट्स दिए जा सकते हैं। रात के खाने में दाल, खिचड़ी के साथ दही या पनीर जैसी चीजें जोड़ी जानी चाहिए।
अगर किसी बुजुर्ग को चबाने या निगलने में परेशानी है, तो सिर्फ रोटी की संख्या बढ़ाने पर जोर न दें। खाना नरम और आसानी से निगलने लायक बनाएं। दाल और सब्जियों को अच्छी तरह पकाकर नरम करके खाना चाहिए। खिचड़ी में दाल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। जरूरत के अनुसार पनीर, दही या सोया भी मील का हिस्सा हो सकता है।
उम्र बढ़ने पर हड्डियों की मजबूती बनाए रखना सबसे जरूरी है। दूध, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के इस्तेमाल और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
बुजुर्गों की थाली में सब्जियां, फल, तरह-तरह की दालें और साबुत अनाज जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। इसके लिए साबुत अनाज, फल, सब्जियां और दालों को प्रमुखता दें। साथ ही पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। उम्र बढ़ने पर प्यास का एहसास कम हो सकता है, इसलिए सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें।