Creatine Monohydrate Supplement: आज के युवा जहां एक ओर फिटनेस को लेकर सजग हुआ हैं, तो वहीं इसके साथ-साथ वे अपने खानपान को लेकर भी कोताही बरत रहे हैं। फिटनेस के दीवानों से आपने क्रिएटिन का नाम जरूर सुना होगा।
क्रिएटिन एक नेचुरल कंपाउंड है, जो हमारे शरीर में नेचुरली लीवर, किडनी और पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है। क्रिएटिन हमारे शरीर के स्केलेटल मसल्स में स्टोर रहता है। इसके अलावा क्रिएटिन मांस, चिकन और मछली जैसे एनिमल बेस्ड फूड प्रोडक्ट्स में भी पाया जाता है। इसी कारण से वेडिटेरियन या फिर वीगन लोगों के शरीर में क्रिएटिन की मात्रा कम होती है। क्रिएटिन शरीर में एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट को दोबारा बनाने में मदद करता है।
यह एक ऐसा ऊर्जा अणु है, जिसकी जरूरत मांसपेशियों को तेज और कम समय वाले शारीरिक कार्यों के दौरान होती है। इसी कारण से जब हमारा शरीर बहुत अधिक ट्रेनिंग करता है, तो इसके साथ क्रिएटिन की आवश्यकता होती है। क्रिएटिन लेने पर ताकत, पावर और मसल्स ग्रोथ में सुधार होता है।
पहले क्रिएटिन को सिर्फ प्रोफेशनल स्पोर्ट्स प्लेयर और जिम जाने वालों का सप्लीमेंट माना जाता था, लेकिन अब वैज्ञानिक इसे मांसपेशियों को सुरक्षित रखने, दिमागी कार्यक्षमता बढ़ाने और उम्र बढ़ने के साथ शरीर को मजबूत बनाए रखने में भी मददगार मानते हैं। यहां तक कि यह महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान भी फायदेमंद होता है।
क्रिएटिन एक ऐसा कंपाउंड है, जिस पर सबसे अधिक रिसर्च किए गए हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट सिर्फ खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी के ओवरऑल हेल्थ और वर्क कैपेसिटी को सपोर्ट करता है।
मसल्स की ही तरह यह ब्रेन हेल्थ को भी एनर्जी देता है। सिडेंट्री लाइफस्टाइल की वजह से तनाव, नींद की कमी और बढ़ती उम्र से होने वाले नुकसान को कम करता है। इससे फोकस, मेमोरी और दिमागी सेहत ठीक रखने में मदद मिलती है।
रिसर्च के अनुसार, जिम जाने वाले लोग क्रिएटिन का इस्तेमाल इसलिए भी करते हैं कि यह उन्हें हाई इंटेंसिटी वर्कआउट के दौरान बेहतर परफॉर्मेंस में मदद करता है। इससे वेट उठाने क्षमता बढ़ती है, जिससे मसल्स ग्रोथ अच्छी होती है।
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर घटने लगता है। इस वजह से शरीर क्रिएटिन का उपयोग कम प्रभावी ढंग से करता है। ऐसे में क्रिएटिन सप्लीमेंट मांसपेशियों और हड्डियों की सेहत को सपोर्ट करता है, खासकर यह तब और अधिक कारगर हो जाता है, जब इसे अच्छी ट्रेनिंग के साथ लिया जाता है।
बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे गिरने और शारीरिक क्षमता कम होने का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च के अनुसार, क्रिएटिन और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को साथ में करने से बैलेंस बढ़ता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह कोई चमत्कारी दवा नहीं है, जिसे स्वस्थ भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
अध्ययन बताते हैं कि क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट सबसे सुरक्षित सप्लीमेंट्स में से एक है। यह वीगन और शाकाहारी लोगों के लिए अच्छा तरीका है। ऐसे लोगों में नेचुरली क्रिएटिन लेवल कम होता है।
एक्सपर्ट के अनुसार, सामान्य तौर पर 3–5 ग्राम क्रिएटिन प्रतिदिन लिया जा सकता है।