Birth Control Pills & Blood Sugar: भारत में कई महिलाएं बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल आता है कि यदि कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स को बंद कर दिया जाए, तो क्या होगा।
दरअसल, बर्थ कंट्रोल पिल्स बंद करने के बाद कई महिलाओं को पीरियड्स, मूड और हार्मोन से जुड़े बदलाव महसूस हो सकते हैं। लेकिन क्या इसका असर ब्लड शुगर लेवल पर भी पड़ सकता है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, पिल्स बंद करने के बाद हार्मोनल बदलाव कुछ महिलाओं में शरीर के ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी को अस्थायी रूप से प्रभावित करते हैं। हालांकि, यह असर हर महिला में एक जैसा नहीं होता।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिल्स बंद करने के बाद शरीर दोबारा अपने नेचुरल हार्मोनल साइकिल में लौटता है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बदलाव होने से कुछ महिलाओं में ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यह बदलाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और सभी महिलाओं में नहीं होते।
बर्थ कंट्रोल पिल्स को बंद करने के बाद उन महिलाओं में इसका जोखिम अधिक होता है, जो पहले से ही प्रीडायबिटीज या डायबिटीज, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, मोटापा या इंसुलिन रेजिस्टेंस से पीड़ित हो और उनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा हो। ऐसे मामलों में हार्मोनल बदलाव ब्लड शुगर कंट्रोल को प्रभावित कर सकते हैं।
अगर पिल्स बंद करने के बाद आपको ये लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लें-
बार-बार प्यास लगना
बार-बार पेशाब आना
अत्यधिक थकान
धुंधला दिखाई देना
अचानक बहुत ज्यादा भूख लगना
बल्ड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए संतुलित और हाई-फाइबर डाइट लेना जरूरी है। साथ ही नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। शुगर कंट्रोल के लिए मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को अवॉयड करना भी जरूरी है। यदि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है, तो डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराएं।
हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बर्थ कंट्रोल पिल्स शुरू करने या बंद करने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही करें। यदि पिल्स किसी मेडिकल कंडीशन, जैसे PCOS या हार्मोनल असंतुलन के लिए दी गई हैं, तो बिना सलाह के इन्हें बंद करना उचित नहीं है।