Traditional Indian Pickles: अचार का स्वाद सिर्फ आम, नींबू या मसालों से नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की कहानी से बनता है। कहीं आम के टुकड़ों में सरसों और लाल मिर्च का तीखापन घुलता है, तो कहीं गुड़ से वही स्वाद मीठा-खट्टा हो जाता है। राजस्थान की केर-सांगरी से लेकर पूर्वोत्तर के बांस के कोमल अंकुर तक, भारत में ऐसी कई चीजों का अचार बनाया जाता है जिनके बारे में जानकर आपको भी हैरानी होगी।
कच्चे और सख्त आम को धोकर अच्छी तरह सुखा लें और फिर छोटे टुकड़ों में काट लें। इसमें लाल मिर्च, सरसों और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब इसमें तिल का तेल डालकर सभी मसालों को आम के टुकड़ों के साथ मिलाएं। तैयार मिश्रण को साफ और सूखे कांच के जार में भरकर कुछ दिनों के लिए धूप में रखें। मसालों का स्वाद आम में अच्छी तरह उतरने के बाद अवकाया खाने के लिए तैयार है।
कच्चे आम को छीलकर कद्दूकस कर लें और इसमें नमक व हल्दी मिलाकर कुछ देर के लिए रखें। अब इसमें गुड़ या चीनी और जरूरत के अनुसार मसाले डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इस मिश्रण को साफ कांच के जार में भरकर कुछ समय के लिए धूप में रखा जाता है। इससे आम और गुड़ का स्वाद अच्छी तरह मिल जाता है। खट्टा-मीठा छूंदो गुजराती खाने की खास पहचान है।
कच्चे आम को धोकर सुखाएं और छोटे टुकड़ों में काट लें। इसमें नमक, लाल मिर्च और हींग जैसे मसाले डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब मसाले लगे आम को साफ और सूखे जार में भरें और ऊपर से इतना तेल डालें कि आम अच्छी तरह ढक जाएं। जार को कुछ समय के लिए रख दें ताकि मसालों का स्वाद आम में अच्छी तरह उतर सके। तैयार हिंग आम में हींग और मसालों की खुशबू मिलती है।
छोटे कच्चे आमों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें। अब इनमें नमक और अचार वाले मसाले डालकर अच्छी तरह मिलाएं। तैयार मिश्रण को साफ और सूखे जार में भरकर बंद कर दें और समय-समय पर जार को हल्का हिलाते रहें। इससे मसाले सभी आमों पर अच्छी तरह लग जाते हैं। कुछ समय बाद छोटे कच्चे आम मसालों का स्वाद लेकर वडु मंगई के रूप में तैयार हो जाते हैं।
केर-सांगरी को साफ करके अच्छी तरह धो लें और जरूरत के अनुसार पानी में भिगोकर नरम करें। इसके बाद इन्हें सुखाकर नमक, लाल मिर्च, सरसों और दूसरे मसालों के साथ मिलाएं। अब इसमें तेल डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें। तैयार मिश्रण को साफ और सूखे जार में भरकर रखें। राजस्थान के शुष्क इलाके में मिलने वाली केर-सांगरी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए यह तरीका अपनाया जाता है। केर-सांगरी की रेसिपी राजस्थान में खूब पसंद की जाती है।
बांस के कोमल कोपलों को साफ करके छोटे टुकड़ों में काटें। इसके बाद इनमें नमक, मिर्च और मसाले मिलाए जाते हैं। कई जगहों पर बांस के अंकुरों को फर्मेंटेशन के लिए भी रखा जाता है, जिससे उनका स्वाद अलग हो जाता है। तैयार अचार में हल्का खट्टा और मसालेदार स्वाद मिलता है। यह पूर्वोत्तर भारत की अलग और विविध परंपरा की झलक देता है।