Extreme Heat and Hormonal Imbalance: भारत के विभिन्न हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और लू का कहर अब केवल थकावट या डिहाइड्रेशन तक ही सीमित नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक तापमान आपके शरीर के अंदरूनी हार्मोनल संतुलन को भी गंभीर रूप से बिगाड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब वातावरण का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो दिमाग का हाइपोथैलेमस (जो शरीर का तापमान और हार्मोन नियंत्रित करता है) भारी दबाव में आ जाता है।
गर्मी के कारण शरीर में तनाव बढ़ाने वाले 'कोर्टिसोल' हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने से व्यक्ति में अचानक चिड़चिड़ापन और नींद की कमी की समस्या होने लगती है। इसके अलावा, बढ़ा हुआ कोर्टिसोल पेट की चर्बी (विजरल फैट) को तेजी से बढ़ाता है। भीषण गर्मी के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा हो जाता है, जिससे वजन अचानक बढ़ सकता है। इसके साथ ही, रक्त में शुगर के स्तर में भी लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है।
हार्मोनल असंतुलन होने पर शरीर कई तरह के संकेत देता है, जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इससे आप बीमार पड़ सकते हैं। इसलिए इन बातों पर जरुर ध्यान देना चाहिए...
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप पहले से ही थायराइड या मधुमेह (डायबिटीज) जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, तो लू और भीषण गर्मी के दौरान आपको अपनी सेहत की अतिरिक्त निगरानी करनी चाहिए। गर्मी के इन दुष्प्रभावों से बचने के लिए दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें।
शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए खूब पानी पिएं। सादे पानी के अलावा इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल पदार्थ जैसे ओआरएस (ORS), नींबू पानी, और नारियल पानी का सेवन अवश्य करें। यदि शरीर में अत्यधिक कमजोरी, लगातार चक्कर आना या घबराहट जैसे कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।