सर्दियों में ठंडी हवा और कम नमी के कारण त्वचा रूखी, बाल बेजान और शरीर में सुस्ती महसूस होने लगती है।
आयुर्वेद के अनुसार ठंड में खानपान, नींद और दिनचर्या बदलने की सलाह दी जाती है।
गर्म और पौष्टिक भोजन, नियमित योग, तेल मालिश और सही स्किन व हेयर केयर से सर्दियों में सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।
How to Control Food Cravings: कभी खाना खाने के कुछ देर बाद ही मीठा खाने का मन करने लगता है, तो कभी शाम होते ही चिप्स, नमकीन या कुछ चटपटा खाने की इच्छा होने लगती है। कई बार पेट भरा होने के बावजूद खाने की तलब इतनी तेज होती है कि खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है।
कभी-कभार अपनी पसंद की चीज खाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन जब बार-बार अनहेल्दी फूड खाने की इच्छा होने लगे और खानपान पर नियंत्रण मुश्किल हो जाए, तो इसकी वजह जानना जरूरी है।
कई बार शरीर को भूख नहीं लगी होती, लेकिन मन किसी खास स्वाद की डिमांड करने लगता है। जैसे- तनाव में मीठा खाने की इच्छा होना या काम के दौरान बार-बार नमकीन खाते रहना। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिमाग कुछ खास खाद्य पदार्थों को कंफर्ट और की भावना से जोड़ता है। इसके अलावा, पर्याप्त नींद न लेना, भोजन के बीच बहुत लंबा अंतर रखना और दिनभर संतुलित भोजन न करना भी क्रेविंग बढ़ाता है।
अगर आपको तनाव, उदासी या बोरियत के समय बार-बार मीठा या जंक फूड खाने का मन करता है, तो अपनी भावनाओं पर ध्यान दें। हर बार खाने को तनाव दूर करने का तरीका न बनाएं। जब भी ऐसी क्रेविंग हो, तो थोड़ी देर टहलें, गहरी सांस लें या अपनी पसंद की कोई दूसरी एक्टिविटी करें। इससे इमोशनल ईटिंग की आदत से बचेंगे।
आयुर्वेद में मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला यानी छह रसों को रोज के भोजन में शामिल करने की बात कही गई है। रोज के खाने में अनाज, दालें, मौसमी सब्जियां, फल, मसाले और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे भोजन में विविधता आती है और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं।
देर रात तक जागने और पर्याप्त नींद न लेने से भूख बढ़ती है और हार्मोन प्रभावित होते हैं। ऐसे में रात में मीठा या स्नैक्स खाने की तलब बढ़ती है। रोज एक नियमित समय पर सोने की कोशिश करें।
अगर आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं या लो कैलोरी खाना खाते हैं, तो बाद में तेज भूख और क्रेविंग हो सकती है। अपनी डाइट में साबुत अनाज, दाल, फल, सब्जियां, नट्स और प्रोटीन के अच्छे सोर्स शामिल करें। क्रैश डाइट या भोजन छोड़ने के बजाय संतुलित खानपान को जगह दें।
भारतीय घरों में भोजन के बाद सौंफ खाने का चलन पुराना है। सौंफ का स्वाद मुंह को ताजगी देता है और कुछ लोगों को भोजन के बाद मीठा खाने की क्रेविंग को भी शांत करता है।
आयुर्वेद में घी को शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। आप अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार दाल, खिचड़ी या रोटी में थोड़ी मात्रा में घी जरूर ऐड करें। इससे खाने का स्वाद बढ़ता है और भोजन में फैट भी मिलता है।
खाना खाने के बाद तुरंत लेटने के बजाय करीब 10 मिनट हल्की वॉक करें। आयुर्वेद में भोजन के बाद कुछ कदम चलने की सलाह दी जाती है। वज्रासन में बैठना भी खाना को पचाने में मददगार है।
अदरक को सब्जी, दाल या सूप में शामिल करें। सोंठ यानी सूखे अदरक का पाउडर भी स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है। आयुर्वेद में अदरक को पाचन के लिए सुपरफूड माना जाता है।