रूस ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान का समर्थन किया (कांसेप्ट फोटो, सौ- सोशल मीडिया) 
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अमेरिका समुद्री डाकू...रूस ने ईरान से फिर निभाई यारी, UN में तेहरान के पक्ष में उठाई आवाज, कहा- नाकेबंदी का हक

US-Iran War: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में Russia ने ईरान का खुलकर समर्थन किया है। राजदूत नेबेंजिया ने पश्चिमी देशों को 'समुद्री डाकू' बताते हुए होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के अधिकारों का बचाव किया।

अक्षय साहू

Russia Support Iran in United Nations: वर्ल्ड पॉलिटिक्स में रूस (Russia) को अक्सर एक “स्थायी सहयोगी” के रूप में देखा जाता है, और एक बार फिर उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ईरान का खुलकर समर्थन किया है। सोमवार, 27 अप्रैल को हुई सुरक्षा परिषद की बैठक में रूस ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने और पाखंड का आरोप लगाया।

संयुक्त राष्ट्र में रूस (Russia) के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि ईरान को अपने समुद्री क्षेत्र, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, में जहाजों की आवाजाही को सीमित करने का अधिकार है, खासकर युद्ध जैसी स्थिति में। उन्होंने तर्क दिया कि जब किसी तटीय देश पर खतरा हो, तो वह अपनी सुरक्षा के लिए समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण लगा सकता है।

राष्ट्रपति पुतिन से मिले अब्बास अराघची

इसी दिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अब्बास अराघची से मुलाकात की और ईरान को मजबूत समर्थन देने की बात दोहराई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के समुद्री और परमाणु मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। रूस ने पहले भी चीन के साथ मिलकर उस प्रस्ताव को वीटो किया था, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की कोशिश की गई थी। इस बार भी रूस ने पश्चिमी देशों के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है और हालात को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

अमेरिका को बताया समुद्री डाकू

राजदूत ने अपने बयान में पश्चिमी देशों की तुलना समुद्री डाकुओं से करते हुए कहा कि वे अपने गैरकानूनी कदमों को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली नीतियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

ईरान पर सारी जिम्मेदारी डालना गलत

रूस  (Russia) ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ईरान पर सारी जिम्मेदारी डालना गलत है, क्योंकि यह एक जटिल क्षेत्रीय संघर्ष है जिसमें कई पक्ष शामिल हैं। उनके अनुसार, किसी भी देश को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार होना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में रूस लगातार संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी देशों के रुख का विरोध करते हुए ईरान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है।

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