सुप्रिया सुले (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
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महाराष्ट्र में लाडकी बहीन योजना पर बड़ा झटका, 80 लाख महिलाएं अपात्र घोषित, सुप्रिया सुले ने बताया विश्वासघात

Supriya Sule Statement: महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना में बड़ा बदलाव! ई-केवाईसी जांच के बाद 80 लाख महिलाएं अपात्र घोषित। सांसद सुप्रिया सुले और सुषमा अंधारे ने सरकार पर साधा निशाना।

गोरक्ष पोफली

Supriya Sule Slams Government: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' (लाडली बहन) योजना को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली अपडेट सामने आई है। योजना में कमियों को सुधारने के लिए दी गई ई-केवाईसी दुरुस्ती की अंतिम मुदत समाप्त होने के बाद भारी संख्या में अपात्र लाभार्थियों का आंकड़ा सामने आया है। छानबीन के बाद इस योजना से तब्बल 80 लाख महिलाएं अपात्र घोषित की गई हैं, जिसके बाद उनका मिलने वाला लाभ अब बंद कर दिया गया है। राकां शरदचंद्र पवार पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने इसे लाडली बहनों के साथ सरकार का विश्वासघात बताया है तो वहीं शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी की उप नेता सुषमा अंधारे ने महिला व बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे से जल्दबाजी की वजह पूछी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना की शुरुआत में कुल 2 करोड़ 46 लाख महिलाएं लाभार्थी थीं। ई-केवाईसी प्रक्रिया और जांच-पड़ताल पूरी होने के बाद अब यह संख्या घटकर 1 करोड़ 66 लाख रह गई है। अपात्र ठहराई गई महिलाओं में कुछ ने ई-केवाईसी में गलत विकल्प चुना था, तो कुछ की प्रक्रिया अधूरी थी। योजना की शर्तों के अनुसार, आवेदक के परिवार की सालाना आय ढाई लाख रुपए से कम होना अनिवार्य था।

सुप्रिया सुले ने साधा निशाना

सुप्रिया सुले ने सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव के दौरान बिना किसी सत्यापन के योजना लागू की गई और अब डेढ़ साल बाद 80 लाख महिलाओं को अपात्र ठहराना सरकार की राजनीतिक, प्रशासनिक और क्रियान्वयन की घोर विफलता है। उन्होंने यह भी मांग की कि केवाईसी की समयसीमा की बाधा हटाकर हर पात्र महिला को योजना का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।

सुषमा अंधारे ने मांगा जवाब

सुषमा अंधारे ने महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिती तटकरे से सीधे जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि 288 करोड़ रुपए अपात्र लाभार्थियों पर खर्च हो गए और अब जब जरूरत नहीं रही, तो महिलाओं को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि योजना लागू करते वक्त इतनी जल्दबाजी क्यों की गई और शुरुआत में ही पात्रता की जांच क्यों नहीं की गई?

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