अशोक खरात CDR विवाद: सुषमा अंधारे ने उठाए अंजलि दमानिया पर सवाल, पूछा- BJP के नेता गायब क्यों?

Ashok Kharat Case: अशोक खरात मामले में सुषमा अंधारे ने अंजलि दमानिया द्वारा जारी CDR पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि गोपनीय जानकारी दमानिया के पास कैसे पहुंची। BJP नेताओं के नाम क्यों नदारद हैं?
Sushma Andhare On Anjali Damania Ashok kharat CDR
सुषमा अंधारे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sushma Andhare On Anjali Damania: शिवसेना (यूबीटी) की सुषमा अंधारे ने कहा कि अशोक खरात मामले को लेकर समाजसेविका अंजली दमानिया द्वारा मोबाइल फोन के सीडीआर रिकॉर्ड सार्वजनिक करना अच्छी बात है, लेकिन इससे कई गंभीर सवाल भी खड़े हुए हैं। उद्धव गुट की नेत्री सुषमा अंधारे ने पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में पूछा कि जब विपक्ष बार-बार मांग करने के बावजूद सीडीआर हासिल नहीं कर पाता, तो दमानिया को यह रिकॉर्ड किसने उपलब्ध कराया?

सुषमा अंधारे ने बीजेपी नेताओं के नाम को लेकर पूछा सवाल

सुषमा अंधारे ने कहा कि दमानिया के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ ने अशोक खरात को 17 कॉल किए थे, लेकिन इन कॉल्स का पूरा इनकमिंग-आउटगोइंग रिकॉर्ड, कॉल का समय और अवधि भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन कॉल्स का संबंध एकनाथ शिंदे तक जाता है, तो फिर भाजपा के अन्य नेताओं के नाम सीडीआर सूची में क्यों नहीं हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि अशोक खरात के ईशान्येश्वर मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने और मंदिर के लिए 1 करोड़ रुपये के सुशोभिकरण निधि को मंजूरी देने वालों का कोई कॉल रिकॉर्ड सामने क्यों नहीं आया। अंधारे ने आरोप लगाया कि दमानिया द्वारा जारी सीडीआर में भाजपा के किसी नेता का नाम न होना संदेह पैदा करता है और यह जांच होनी चाहिए कि भाजपा के किन नेताओं का खरात से संपर्क था।

खरात के सीडीआर और संपत्ति की जांच की जाए

इस प्रकरण में जांच को इतने दिन बीत जाने के बावजूद एसआईटी से कोई जानकारी नहीं दी जा रही। हमारी मांग है कि अशोक खरात के सीडीआर और संपत्ति की जांच की जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा था कि शिवानिक ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा जांच की जाएगी। तब सवाल उठता है कि गेमे, आवारे, पोफले को क्यों हिरासत में नहीं लिया गया और अधिकारी भांडे एसआरए विभाग में क्यों गए?

चाकणकर को निशाना बनाना पर्याप्त नहीं

अंधारे ने सवाल उठाया कि अशोक खरात प्रकरण में रुपाली चाकणकर की पूछताछ के समन की चर्चा थी। लेकिन उन्होंने तीन दिन मौन रखा। इसके बाद ही उन्होंने बयान दिया। इन तीन दिनों में क्या रुपाली चाकणकर ने जांच एजेंसियों को नियंत्रित किया? क्या वह यह दिखाना चाहती थीं कि जांच एजेंसी मेरे हाथ में है, मैं एसआईटी को मोड़ सकती हूं?

अंधारे ने कहा कि दमानिया हर बार सरकारी गोपनीय जानकारी बाहर लाती हैं। एसआईटी से जानकारी नहीं मिलती, बल्कि यह दमानिया से आती है। इसका मतलब है कि प्रकरण का न्याय नहीं हो रहा, केवल कुछ लोगों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है। इस मामले में महाराष्ट्र की लड़कियों की प्रतिष्ठा पर चोट पहुंचाई गई है। केवल रुपाली चाकणकर को निशाना बनाना पर्याप्त नहीं है।

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