महुआ माझी (स्त्रोत- सोशल मीडिया) 
झारखंड

BJP का गठबंधन 'विनाशकारी', सांसद महुआ माझी बोलीं-क्षेत्रीय दलों को बर्बाद करना भाजपा की रणनीति

JMM MP Statement: जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा कि भाजपा जिस क्षेत्रीय दल से गठबंधन करती है, अंततः उसी को नुकसान पहुँचाती है। अब इस बयान ने भाजपा की गठबंधन राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सजल रघुवंशी

JMM MP Criticizes BJP Coalition: झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा पर गंभीर राजनीतिक प्रहार किया है। आईएएनएस के साथ बातचीत में उन्होंने दावा किया कि भाजपा जिस भी क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन करती है, उसका अंततः नुकसान ही होता है।

महुआ माझी ने बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम को जनादेश का अपमान करार देते हुए कहा कि नीतीश कुमार का चेहरा देखकर वोट देने वाली जनता के साथ यह सरासर धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा का यह रवैया अन्य क्षेत्रीय दलों के लिए एक सबक है, जो भविष्य में किसी भी गठबंधन से पहले दो बार सोचने को मजबूर होंगे।

ओडिशा का उदाहरण देकर किया आगाह

झारखंड मुक्ति मोर्चा की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए ओडिशा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बीजू जनता दल (बीजेडी) के साथ भाजपा का जो व्यवहार रहा, वह किसी से छिपा नहीं है। पहले बीजेडी के समर्थन से संसद में कई विवादित बिल पारित कराए गए और बाद में उसी पार्टी की जड़ों को खोखला कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेडी के कई सांसदों को तोड़कर भाजपा में शामिल करना इस कहावत को चरितार्थ करता है कि "जिस थाली में खाया, उसी में छेद कर दिया।"

राज्यपालों की भूमिका पर उठाए सवाल

राज्यपालों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के मुद्दे पर महुआ माझी ने भाजपा पर संवैधानिक पदों के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने जगदीप धनखड़ के पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहते हुए ममता बनर्जी के साथ उनके टकराव को याद दिलाया और कहा कि एक निष्पक्ष संवैधानिक पद को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया था। उन्होंने झारखंड का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ भी राज्यपाल के माध्यम से मुख्यमंत्री को परेशान करने की कोशिशें की गई थीं। उन्होंने कहा कि सीएम ममता बनर्जी की चिंताएं पूरी तरह से जायज हैं क्योंकि भाजपा राज्यों में अपनी राजनीतिक चालें चलने के लिए राज्यपाल के पद का उपयोग करती है।

मिडिल ईस्ट संकट पर भी सवाल

मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक तनाव पर महुआ माझी ने सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार "विश्वगुरु" बनने का दावा तो करती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संकट के समय अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाता। उन्होंने ऑपरेशन 'सिंदूर' का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा और उनकी स्वदेश वापसी होनी चाहिए। माझी ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया युद्ध की दहलीज पर है और ऐसे समय में परमाणु संकट के खतरों को देखते हुए सरकार को संयम और कूटनीतिक संतुलन के साथ काम करने की आवश्यकता है।

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