Omar Abdullah Independence Day Speech: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आज हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। आज का दिन खुशी और याद करने का भी दिन है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर भी बड़ा बयान दिया।
श्रीनगर में तिरंगा झंडा फहराने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज जब मैं सीमा और नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार के हालात देखता हूं, तो मुझे महसूस होता है कि 80 साल पहले हमारे नेताओं ने हमारे लिए जो फैसला लिया था, वह बिल्कुल सही था। जिन्होंने 'हमलावर खबरदार' का नारा दिया था, वे सही थे और उनकी कुर्बानियां पूरी तरह जायज थीं।
सीएम अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा हमारा है। हम उन लोगों को अपना मानते हैं। उनमें से कोई भी अजनबी या बाहरी नहीं है। आज भी जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उनके लिए सीटें आरक्षित हैं, इस उम्मीद में कि कभी न कभी वे उन खाली सीटों पर बैठ सकेंगे और उनका इस्तेमाल कर सकेंगे।
अब्दुल्ला ने कहा कि आज जब हम नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार जम्मू-कश्मीर के उस हिस्से के हालात देखते हैं, तो दुख, अफसोस और गहरी तकलीफ होती है।
उमर अब्दुल्ला ने लोकतंत्र और हमारा संघवाद को देश की दो सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि हर हाल में लोकतंत्र की रक्षा करना, हर परिस्थिति में लोकतंत्र को मजबूत करना और लोकतंत्र को जिंदा रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारियां हैं। इसके साथ ही इस देश में संघवाद की रक्षा करना और उसे मजबूत बनाना भी हमारा कर्तव्य है, जिससे हम पीछे नहीं हट सकते।
एक दिन पहले भी उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी। सिंधु जल समझौते पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि शुक्र है कि शहबाज शरीफ को अकल आई। ये हम लोगों का खून चूसा गया है। ये हमारी दरियाएं हैं, इस पर पहला अधिकार हमारा बनता था।
उन्होने कहा कि कहने के लिए पाकिस्तान वाले कहते हैं कि वे कश्मीरियों के बड़े हमदर्द हैं लेकिन जब पानी पर बात आ जाती है तो उनकी हमदर्दी गायब हो जाती है। कहां थी उनकी ये हमदर्दी जब हमारे दरियाओं का इस्तेमाल करने की इजाजत हमसे छीनी गई? तब से लेकर आज तक इस सिंधु जल संधि का खामियाजा हम भुगत रहे हैं। सिंधु जल समझौता निलंबित है, ये निलंबित ही रहना चाहिए ताकि हम इस पानी का सही इस्तेमाल कर पाएं।