Jammu Land Encroachment News: जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा रिंग रोड कॉरिडोर के लिए एक बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान (Demolition Drive) चलाया गया। यह कार्रवाई अवैध निर्माणों पर रोक लगाने और सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करने हेतु रिंग रोड कॉरिडोर के किनारे की गई। कार्रवाई में इस दौरान 15 से अधिक अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया। ये निर्माण सक्षम प्राधिकरण से बिना अनुमति लिए किया गया था। जेडीए के अनुसार, ये निर्माण स्वीकृत भूमि उपयोग मानकों और भवन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन कर रहे थे।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ये अवैध ढांचे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे थे। इनमें से कई संरचनाएं या तो संरचनात्मक रूप से कमजोर थीं या फिर महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर बनी थीं, जिससे आसपास के आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जानमाल का खतरा बढ़ गया था।
प्राधिकरण द्वारा चलाया गया यह ध्वस्तीकरण अभियान जेडीए के प्रवर्तन विंग द्वारा स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था एजेंसियों की सहायता से चलाया गया, जिससे पूरी कार्रवाई शांतिपूर्वक और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुई। नियमों के तहत पहले ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, जिससे उन्हें नियमों का पालन करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।
जम्मू विकास प्राधिकरण ने जम्मू में नियोजित विकास बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और आम जनता से अपील की कि वे निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक अनुमतियां अवश्य लें और भवन नियमों का सख्ती से पालन करें। जेडीए ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि वे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालते हैं और शहरी विकास की व्यवस्था को भी बाधित करते हैं। ऐसे मामलों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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जम्मू शहर में जम्मू विकास प्राधिकरण और श्रीनगर शहर में श्रीनगर विकास प्राधिकरण एसडीए के साथ-साथ दो नगर निगम विकास योजनाओं और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं, ताकि दोनों राजधानी शहरों का सुरक्षित, व्यवस्थित और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके। प्राधिकरण की तरफ से की गई कार्रवाई पर स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि करीब 2 वर्षों से अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण कार्य हुए थे, इस पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई थी।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया था कि जेडीए की 16 हजार कनाल से अधिक की जमीन पर अतिक्रमण है।