earthquake in kishtwar 
जम्मू कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भूकंप के झटके, जानें कितनी थी तीव्रता

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार किश्तवाड़ में आए भूकंप का केंद्र उत्तर में अक्षांश 32.29 और पूर्व में देशांतर 76.67 पर जमीन से 10 किलोमीटर अंदर था। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल कहीं से भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

शुभम पाठक

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां शनिवार सुबह 5:34 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिसके बाद लोग अपने घर से बाहर निकल खाली मैदान की ओर भागने लगे। वहीं बात अगर इसकी तीव्रता की करें तो रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई।

इसके साथ ही इस मामले में जानकारी देते हुए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार किश्तवाड़ में आए भूकंप का केंद्र उत्तर में अक्षांश 32.29 और पूर्व में देशांतर 76.67 पर जमीन से 10 किलोमीटर अंदर था। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल कहीं से भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

घर से बाहर निकले लोग

किश्तवाड़ में आए भूकंप के झटके के बाद वहां रह रहे लोंगो में डर का महौल हो गया। जिसके बाद लोग अपने घर से बाहर निकलकर मैदान की ओर जाने लगे। जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक इस झटके से किसी भी प्रकार की जान माल की छति होने की खबर सामने नहीं आई है।

भूकंप क्यों आते है?

चलिए अब आपको बतातें है कि आखिर भूकंप के झटके क्यों आते है। जानकारी के लिए बता दें कि धरती के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जिस क्षेत्र में ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन कहते हैं। बार-बार टकराने से प्लेटों के कोने मुड़ जाते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है, तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

तीव्रता का क्या होता है प्रभाव

इसके साथ ही अब आपको बतातें है कि भूकंप के केंद्र और उसके तीव्रता का क्या प्रभाव होता है। आपी जानकारी के लिए बता दें कि भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है, जिसके ठीक नीचे प्लेटों की हलचल के कारण भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति कम होते-होते इसका असर कम होता जाता है।

फिर भी अगर रिक्टर स्केल पर 7 या इससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में कंपन तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की ओर है या रेंज में। अगर कंपन की आवृत्ति ऊपर की ओर है, तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

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