बांग्लादेश बॉर्डर पर अवैध प्रवासियों की भीड़ (फोटो- सोशल मीडिया) 
देश

बंगाल में SIR के डर से भयंकर बवाल, बांग्लादेश बॉर्डर पर मची भगदड़! अवैध प्रवासियों में अफरातफरी

West Bengal की सीमा पर इन दिनों स्थिति असहज करने वाली बनी हुई है, ECI द्वारा किए जा रहे SIR को लेकर बंगाल में थोड़ा ज्यादा बवाल है। लोग अपने बोरिया-बिस्तर समेटकर सीमा पर जाने को मजबूर है।

सौरभ शर्मा

West Bengal Illegal Immigrants Afraid SIR Process: पश्चिम बंगाल की सीमा पर इन दिनों एक अजीब और हैरान करने वाला नजारा देखने को मिल रहा है। बरसों से भारत में छिपे अवैध बांग्लादेशियों के बीच अचानक भगदड़ मच गई है। मतदाता सूची के गहन रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया शुरू होते ही, जो लोग दशकों से बिना कागजों के यहां रह रहे थे, अब अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर वापस भाग रहे हैं। बॉर्डर पर लंबी कतारें लगी हैं और हर किसी को बस सरहद पार करने की जल्दी है। यह डर इतना गहरा है कि वे अब भारत छोड़ने को मजबूर हैं।

उत्तरी 24 परगना के स्वरूप नगर चेकपोस्ट के पास हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता से करीब 80 किलोमीटर दूर इस इलाके में सैकड़ों लोग अपने सामान के साथ बॉर्डर पार करने का इंतजार कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई लोग 5 से 10 साल या उससे भी ज्यादा समय से भारत में रह रहे थे। कई ऐसे हैं जिनका बचपन यहीं बीता है। इनके पास न तो आधार कार्ड है और न ही कोई वैध दस्तावेज, फिर भी ये बेखौफ होकर यहां रह रहे थे, लेकिन अब एसआईआर ने इनकी नींद उड़ा दी है।

28 जानें गईं, खौफ का मंजर

इस सख्ती का असर सिर्फ अवैध प्रवासियों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों पर भी भारी पड़ रहा है। बुधवार को जलपाईगुड़ी में काम के भारी दबाव के चलते एक और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने आत्महत्या कर ली। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक 28 लोग अपनी जान दे चुके हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस प्रक्रिया को अमानवीय करार दिया और चुनाव आयोग से इसे तुरंत रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि जो काम तीन साल में होता था, उसे दो महीने में पूरा करने का दबाव डाला जा रहा है।

बिखरते परिवार, आयोग जिम्मेदार

माल विधानसभा क्षेत्र से विधायक और मंत्री बुलुचिक बड़ाइक ने मृतक बीएलओ के परिवार से मुलाकात की और कहा कि काम के दबाव ने एक खुशहाल परिवार को बिखेर दिया है। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर चुनाव आयोग को जिम्मेदारी लेने की बात कही है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव से पहले एसआईआर के खिलाफ अब खुली जंग का ऐलान कर दिया है। जहां एक तरफ सीमा पर अवैध प्रवासियों की भीड़ है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के भीतर कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। यह मुद्दा अब बंगाल की राजनीति में एक बड़ा तूफान बनकर उभर रहा है, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को आमने-सामने ला खड़ा किया है।

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