मणिशंकर अय्यर  सोर्स- सोशल मीडिया
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कांग्रेस का बड़ा फैसला, सरकारी प्रोटोकॉल दरकिनार, वंदे मातरम के केवल दो पद गाने की परंपरा पर रहेगी कायम

Vande Mataram Controversy: कांग्रेस ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम के केवल पहले दो पद गाने की 1937 की परंपरा पर कायम रहने का फैसला किया है। मणिशंकर अय्यर ने केंद्र सरकार के पूरे गान के नियम पर सवाल उठाए हैं

अनन्या तिवारी

Congress Stance On Vande Mataram Protocol: देश में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद गाने की अपनी पुरानी परंपरा पर ही कायम रहेगी। पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रगीत के पूर्ण गान को आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाए जाने पर असहमति जताते हुए, वर्ष 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा तय किए गए रास्ते पर चलेंगे, न कि केंद्र सरकार के नए प्रोटोकॉल के मुताबिक।

1937 का फैसला और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह

कांग्रेस का यह रुख कांग्रेस कार्यसमिति के उस प्रस्ताव के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें पार्टी ने 1937 में लिए गए अपने पुराने फैसले को दोबारा दोहराया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने इस निर्णय पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसके इतिहास का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि साल 1937 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर ही यह तय किया गया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ पहले दो पद ही गाए जाएंगे। पार्टी आज भी उसी ऐतिहासिक मार्ग पर आगे बढ़ रही है और अपने पुराने आदर्शों से समझौता नहीं करेगी।

मणिशंकर अय्यर का तीखा हमला

इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है। मणिशंकर अय्यर ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुसलमानों के प्रति नफरत की वजह से ही 'वंदे मातरम' के पूरे पाठ को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने सरकार पर तीखा पलटवार करते हुए कहा, 'वे सोचते हैं कि अगर आप मुसलमानों के खिलाफ हैं, तभी आप हिंदू हो सकते हैं, तभी आप भारतीय हो सकते हैं'।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए अय्यर ने कहा कि आजकल विपक्ष के विचारों का मुकाबला करने के लिए 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को अब महसूस हो रहा है कि उसका समय आने वाला है और 'मोदी युग' अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, यही वजह है कि पार्टी के कार्यक्रमों में भारी भीड़ उमड़ रही है।

स्वतंत्रता संग्राम और इतिहास का हवाला

कांग्रेस के नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने इस मुद्दे पर देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति ने यह दृढ़ता से तय किया है कि पार्टी उन्हीं नेताओं के दिखाए रास्ते पर चलेगी जिन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।

महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद का नाम लेते हुए सप्पल ने सवाल उठाया कि जब इन महान नेताओं ने मिलकर 'वंदे मातरम' के दो-पद वाले संस्करण को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था, तो फिर आज कोई और उन्हें देशभक्ति का पाठ कैसे पढ़ा सकता है? उन्होंने कहा कि जिन लोगों का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था, वे देशभक्ति का मतलब नहीं सिखा सकते।

बिहार कांग्रेस समर्थन में

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने भी इस निर्णय का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति पार्टी की सबसे बड़ी और सम्मानित संस्था है, जिसके निर्णयों का सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पीर्टी के वर्तमान नेताओं को महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान विचारकों के निर्णयों और नीतियों का पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए, क्योंकि इन दिग्गजों ने मिलकर देश के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे।

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