Assam UCC Bill: असम सरकार ने राज्य विधानसभा में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल' पेश किया। इस बिल को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया। विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में UCC बिल पेश किए जाने का विरोध किया और इसे पेश करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।
असम विधानसभा में आज हिमंता बिस्व सरमा की सरकार ने समान नागरिक संहिता यूसीसी विधेयक पेश किया। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में UCC बिल पेश किए जाने का विरोध किया और इसे पेश करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।
हालांकि, सदन ने इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे दी और इसे सदन पर पटल रखा गया। गुजरात और उत्तराखंड के बाद अब असम तीसरा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने बताया कि इस बिल का मसौदा विशिष्य जनसांख्यिकीय विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया।
UCC बिल के 'उद्देश्यों और कारणों के विवरण' की रूपरेखा बताते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन संबंधों से जुड़े कानूनों को आसान और एक समान बनाना है। उन्होंने बताया कि इस बिल में शादी के लिए पुरुषों की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं की 18 साल तय की गई है, और बहुविवाह पर रोक लगाई गई है।
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इस बिल पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "पहली बार, यह बिल लिव-इन संबंधों के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर, यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे संबंधों में रहने वाले पार्टनर्स के अधिकारों की रक्षा हो, और ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता मिले और उनकी सुरक्षा हो।" हालांकि, UCC बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह असम में रहने वाले किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा।