असम विधानसभा (सौजन्य-IANS) 
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असम में हिमंत सरकार ने पेश किया UCC बिल, विधानसभा में विपक्ष ने किया जबरदस्त हंगामा, लिव-इन को लेकर नया ऐलान

UCC Bill: असम सरकार ने राज्य विधानसभा में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल' पेश किया। असम विधानसभा में UCC बिल पेश करने के बाद विपक्ष ने हंगामा कर दिया और इसका विरोध किया।

प्रिया जैस

Assam UCC Bill: असम सरकार ने राज्य विधानसभा में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल' पेश किया। इस बिल को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया। विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में UCC बिल पेश किए जाने का विरोध किया और इसे पेश करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।

असम विधानसभा में आज हिमंता बिस्व सरमा की सरकार ने समान नागरिक संहिता यूसीसी विधेयक पेश किया। इस विधेयक को लेकर कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में UCC बिल पेश किए जाने का विरोध किया और इसे पेश करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।

हालांकि, सदन ने इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे दी और इसे सदन पर पटल रखा गया। गुजरात और उत्तराखंड के बाद अब असम तीसरा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया।

UCC विधेयक के उद्देश्य

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने बताया कि इस बिल का मसौदा विशिष्य जनसांख्यिकीय विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया।

  • राज्य में बहुविवाह की प्रथा पर रोक लगाना।
  • शादी के लिए कम-से-कम उम्र की सीमा को लागू करना।
  • सभी शादियों और तलाक को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करना अनिवार्य कराना।
  • बेटियों को पैतृक संपत्ति (पिता की संपत्ति) से बराबरी से हक मिलना।
  • लिव-इन में रहने वाले लोगों के लिए सख्त नियम बनाना और लिव इन का रजिस्ट्रेशन कराना है।

हिमंत बिस्व सरमा ने दी जानकारी

UCC बिल के 'उद्देश्यों और कारणों के विवरण' की रूपरेखा बताते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन संबंधों से जुड़े कानूनों को आसान और एक समान बनाना है। उन्होंने बताया कि इस बिल में शादी के लिए पुरुषों की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं की 18 साल तय की गई है, और बहुविवाह पर रोक लगाई गई है।

इस बिल पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "पहली बार, यह बिल लिव-इन संबंधों के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर, यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे संबंधों में रहने वाले पार्टनर्स के अधिकारों की रक्षा हो, और ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता मिले और उनकी सुरक्षा हो।" हालांकि, UCC बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह असम में रहने वाले किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा।

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