नवभारत संपादकीय: असम में फिर चला हिमंत का जादू, 126 में 82 सीटें जीत BJP ने रचा इतिहास

Himanta Biswa Sarma Victory: असम में हिमंत बिस्वा सरमा की मजबूत चुनावी जीत, उपराष्ट्रवाद, कल्याणकारी राजनीति और अवैध घुसपैठ के मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।
Navabharat Editorial: Himanta's Magic Works Again in Assam; BJP Creates History by Winning 82 Out of 126 Seats.
Assam Politics, Himanta Biswa Sarma(सोर्स: सोशल मीडिया)
Updated on

Assam BJP Election Win: असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार कहीं ज्यादा बहुमत के साथ सरकार बनाई है। उनकी चुनावी जीत में बीजेपी की संगठनात्मक शक्ति व प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रीय प्रभाव के अलावा खुद के मजबूत प्रयासों का भी योगदान रहा है। अपने पिछले कार्यकाल में हिमंत ने राज्य में बीजेपी का आधार पुष्ट किया लेकिन इस बार चुनाव में उन्होंने आक्रामक और प्रभावी ढंग से असम के उपराष्ट्रवाद पर बल दिया। हिंदू बहुलवाद तथा लोक कल्याणकारी कदमों पर उनका विशेष जोर था। उनका तीखा आरोप था कि असम में अवैध रूप से आकर बसे बांग्लादेशी घुसपैठिए स्थानीय लोगों की नौकरियां व अवसर छीन रहे हैं तथा भूमि हड़प रहे हैं। ये लोग असम की संस्कृति के लिए खतरा हैं।

उल्लेखनीय है कि आरएसएस भी कितने ही दशकों से असम में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ तथा पिछली कांग्रेस सरकारों व्दारा उन्हें बोट बैंक के रूप में बसाए जाने का मुद्दा उठाता रहा है। यह घुसपैठ का सिलसिला फखरुद्दीन अली अहमद और गनी खान चौधरी की सरकारों के समय से चलता आ रहा था। हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठियों को चुन-चुन कर वापस भेजने का संकल्प व्यक्त किया, उनके नेतृत्व में 126 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी को 82 सीटों पर विजय मिली।

गठबंधन मिलाकर कुल 102 सीटों की बड़ी मेजॉरिटी हिमंत के पास है। असम का इतिहास काफी जटिल और उथलपुथल का रहा है। 19 वीं सदी में इसे बंगाल में शामिल किया गया था। देश विभाजन के दौरान वहां भीषण हिंसा हुई थी। दंगाइयों को शांत करने के लिए वहां महात्मा गांधी पहुंचे थे। जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन के निर्देश पर और शहीद हसन सुहरावदों के प्रोत्साहन से वहां हजारों हिंदुओं की हत्या की गई थी।

इसके बावजूद महात्मा गांधी ने हिंदुओं से अहिंसा का पालन कर शस्त्र त्यागने की अपील की थी। 1970 व 1980 में भी असम में हिंसक आंदोलन हुए थे। हिमंत की सरकार इस बात पर अडिग है कि घुसपैठ के जरिए राज्य में मूल असमवासियों को अल्पसंख्यक बनाने की जो साजिश जारी थी, वह अब चलने नहीं दी जाएगी और विदेशियों को बाहर किया जाएगा।

हिमंत बिस्वा सरमा ने लड़के-लड़‌कियों की शिक्षा के लिए निजुत बाबू व निजुत मोदना योजनाएं चलाई हैं। ओरुणोदोयी योजना के तहत महिलाओं को नकद रकम का हस्तांतरण हो रहा है। इसके अलावा महिला उद्यमिता व आत्मनिर्भर असम जैसे कार्यक्रम हैं। सुदूर जिलों को शहरी केंद्रों से जोड़ा जा रहा है। मिशन वसुंधरा के जरिए भूराजस्व सेवा व संपत्ति के अधिकारों तक पहुंच आसान बनाई जा रही है।

इन बातों से राज्य में बीजेपी का प्रभाव बढ़ा है। 2014-15 व 2023-24 में असम ने 11.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज को। अब सवाल उठता है क्या मुख्यमंत्री विभाजनकारी नीति पर चलते रहेंगे या राज्य के दीर्घकालीन हित में समन्वय, विश्वास व सामाजिक समता की राजनीति अपनाएंगे?

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live
navbharatlive.com