12 Years of Swachh Bharat Mission: भारत में स्वच्छता को लेकर बड़े स्तर पर बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। महात्मा गांधी की जयंती के दिन शुरू हुए इस अभियान का शुरुआती जोर खुले में शौच की समस्या खत्म करने और देश के हर घर तक शौचालय पहुंचाने पर था।
2026 तक आते आते स्वच्छ भारत मिशन का दायरा काफी बढ़ चुका है। अब इसके तहत शौचालय निर्माण के साथ गांवों में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, शहरों में कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण, पुराने कचरे के पहाड़ हटाने और स्वच्छता को लेकर लोगों के व्यवहार में बदलाव पर भी जोर दिया जा रहा है। आज 2 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियान को 12 साल पूरे हो रहे हैं। आइए इस मौके पर आपको बताते हैं कि यह स्वच्छता का यह महा अभियान की कितना सफल रहा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 2 अक्टूबर 2014 से 4 फरवरी 2026 तक देश में 12.04 करोड़ से ज्यादा व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों का निर्माण दर्ज किया गया। आंकड़ों के मुताबिक 2026 की शुरुआत तक करीब 2.68 लाख सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का भी निर्माण हो चुका था। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय कवरेज 2014 में करीब 39 प्रतिशत थी, जो बाद के वर्षों में 100 प्रतिशत तक पहुंची।
मिशन के दूसरे चरण में सरकार का फोकस केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है। अब गांवों को ODF Plus बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ODF Plus का मतलब ऐसे गांवों से है जहां खुले में शौच की स्थिति कायम न रहे, साथ ही ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था हो और गांव साफ दिखाई दे।
17 सितंबर 2026 तक देश में 5.69 लाख से ज्यादा गांव ODF Plus घोषित किए जा चुके थे। इनमें 5.25 लाख से ज्यादा गांव ODF Plus Model श्रेणी में पहुंच चुके थे। इसी अवधि तक 5.38 लाख से ज्यादा गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन और 5.65 लाख से ज्यादा गांवों में तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था दर्ज की गई।
स्वच्छ भारत मिशन शहरी के तहत 2014 से 2026 के बीच शहरों में 63 लाख से ज्यादा व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए। इसके अलावा करीब 6 लाख सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया गया। आंकड़ों के अनुसार 4,692 शहरों को ODF घोषित किया जा चुका है। इनमें 4,314 शहर ODF Plus और 1,973 शहर ODF Plus Plus के रूप में प्रमाणित हैं।
2026 में स्वच्छ भारत मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कचरा प्रबंधन बन चुका है। शहरी भारत में घर घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था 2014 के 43 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में करीब 98 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में ठोस कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता भी तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक 2014 में शहरों में पैदा होने वाले ठोस कचरे का सिर्फ 16 प्रतिशत प्रोसेस किया जाता था। 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 82 प्रतिशत हो गया है।
शहरों में लंबे समय से जमा पुराने कचरे यानी विरासत अपशिष्ट को हटाना भी स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 का बड़ा लक्ष्य है। मई 2026 तक देश के 2,482 डंपसाइट्स पर मौजूद करीब 26 करोड़ मीट्रिक टन पुराने कचरे में से लगभग 65 प्रतिशत का निस्तारण या रेमेडिएशन किया जा चुका था। इससे करीब 9,000 एकड़ शहरी जमीन को दोबारा उपयोग में लाने की दिशा में काम हुआ है।
ग्रामीण स्वच्छता में कचरे को संसाधन में बदलने पर भी काम किया जा रहा है। गोवर्धन योजना (GOBARdhan Scheme) के तहत 17 सितंबर 2026 तक देश के 585 जिलों में 1,314 सामुदायिक बायोगैस प्लांट चालू थे।
इसका उद्देश्य गोबर और जैविक कचरे का इस्तेमाल करके बायोगैस और दूसरे उपयोगी संसाधन तैयार करना है। इससे गांवों में कचरे के प्रबंधन के साथ साथ स्थानीय स्तर पर उपयोगी ऊर्जा पैदा करने की दिशा में भी काम हो रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत भले ही शौचालय और खुले में शौच की समस्या से निपटने के लिए हुई थी, लेकिन 2026 तक इसका स्वरूप काफी व्यापक हो चुका है। अब मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ODF Plus Model गांव, ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन और बायोगैस जैसे क्षेत्रों पर काम किया जा रहा है। वहीं शहरी क्षेत्रों में घर घर कचरा संग्रहण, कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण, स्रोत पर कचरा अलग करना और पुराने डंपसाइट्स की सफाई प्रमुख लक्ष्य बन चुके हैं।
इस तरह 2014 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर शुरू हुआ स्वच्छता का यह महामिशन 2026 तक सिर्फ शौचालय निर्माण का अभियान नहीं रह गया है। अब इसके केंद्र में स्वच्छता की बुनियादी सुविधाओं से आगे बढ़कर कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और साफ गांवों तथा कचरा मुक्त शहरों की दिशा में है।