सुप्रीम कोर्ट, (फाइल फोटो) 
देश

सड़क खराब तो टोल टैक्स क्यों? NHAI को सुप्रीम कोर्ट की फटकार; बोला- यह लोगों के साथ अन्याय

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे पर वसूले जाने वाले टोल टैक्स को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। केरल हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सभी याचिका खारिज कर दी।

मनोज आर्या

Supreme Court: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल हाईवे पर टोल वसूले जाने वाले टोल पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि की जिन राष्ट्रीय राजमार्गों पर गड्ढे, जाम और अच्छी व्यवस्था नहीं हैं, वहां लोगों को टैल टैक्स भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। यह मामला केरल हाईकोर्ट के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें त्रिशूर जिले के पालयेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल वसूली को निलंबित कर दिया गया था।

बता दें कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और अन्य पक्षों ने केरल कोर्ट द्वारा दिए गए इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने भी केरल हाई कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

नागरिकों को सड़कों पर चलने का पूरा अधिकार

अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश के लोगों को उन सड़कों पर स्वतंत्र रूप से चलने का अधिकार है, जिसके लिए वे पहले ही टैक्स चुका चुके हैं। नागरिकों को गड्ढों और खस्ताहाल सड़कों से गुजरने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर गटर, गड्ढे और लगातार ट्रैफिक जाम प्रशासनिक अक्षमता का प्रतीक हैं।

एक घंटे की दूरी पूरी करने में लगते हैं 12 घंटे

एनएचएआई द्वारा दी गई याचिका की सुनावई करने वाली बेंच ने कहा कि अगर 65 किलोमीटर के किसी हाईवे का सिर्फ 5 किलोमीटर हिस्सा ही खराब है, तो भी उसका असर इतना बड़ा होता है कि पूरी दूरी तय करने में घंटों लग जाते हैं। बेंच ने सवाल पूछा कि आखिर एक शख्स को 150 रुपये क्यों चुकाने चाहिए, जब उसे एक घंटे में पूरी की जाने वाली दूरी तय करने में 12 घंटे लग रहे हों? कोर्ट ने कहा कि यह नागरिकों के साथ अन्याय है और ऐसी स्थिति में टोल वसूली को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि टोल बूथ पर अक्सर कम कर्मचारी होते हैं। उनके पास काम अधिक होता है। वह अक्सर राजा की तरह बर्ताव करने लगते हैं। लोग लंबी कतार में लगे अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहते हैं, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ता। गाड़ियों के इंजन ऑन रहते हैं। यह लोगों के धैर्य और जेब के अलावा पर्यावरण पर भी भारी पड़ता है।

मणिपुर दहलाने की साजिश नाकाम, 13 उग्रवादी गिरफ्तार, रॉकेट-ग्रेनेड से लैंडमाइन तक बड़े हथियार बरामद

तिब्बत में बाढ़ से तबाही, सद्गुरु के कैलाश यात्रा ग्रुप के लोग फंसे; 77 इमिग्रेशन सेंटर पर, देखें VIDEO

Explainer: नेपाल में अचानक क्यों आई भारी तबाही, क्या है वो असली वजह; जिसने तबाह की सैकड़ों जिंदगियां

नेपाल में जलप्रलय से यूपी-बिहार पर आफत, सरकार ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, इन जिलों में तबाही का हाई अलर्ट

कर्नाटक वाल्मीकि निगम मामले में घिरे नागेंद्र, BJP ने बनाया दबाव, इस्तीफे की अटकलों पर खुद दिया जवाब