सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 100% एथेनॉल वाहनों के लिए पर्याप्त ईंधन की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित होगी।
अदालत ने एथेनॉल नीति में किसानों के सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया।
E100 वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन नियमों में बदलाव हुआ है, लेकिन पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा बढ़ाने की तत्काल योजना नहीं है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि अगर 100 फीसदी एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी जाती है, तो उनकी ईंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त एथेनॉल की आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी। अदालत ने कहा कि एथेनॉल नीति पर विचार करते समय व्यापक जनहित, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के सशक्तीकरण को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
जस्टिस एमएम सुंदरश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान पीठ ने हाल की मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख किया, जिनमें 100 फीसदी एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दिए जाने की बात कही गई थी।
पीठ ने सवाल किया कि अगर ऐसे वाहनों को अनुमति मिलती है, तो उनकी मांग के अनुरूप ईंधन की आपूर्ति कैसे की जाएगी। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एथेनॉल से जुड़े फैसलों को केवल ईंधन की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसके व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर भी विचार होना चाहिए। जस्टिस सुंदरश ने किसानों के हितों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और किसानों को सशक्त बनाने के पहलू पर पर्याप्त ध्यान देने की जरूरत है।
पीठ ने कहा कि किसानों के सशक्तीकरण को भी इस मुद्दे का अहम हिस्सा बनाया जाना चाहिए। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह अपनी दलीलों में किसानों से जुड़े पहलुओं पर भी बात करेंगे।
सुनवाई के दौरान एक वकील ने दलील दी कि एथेनॉल को बढ़ावा देने से किसानों को किसी न किसी रूप में लाभ हो सकता है। वहीं, दूसरे वकील ने कहा कि केंद्र सरकार की नीति में किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई नवंबर में तय की है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किया था। इसके तहत E100 तक एथेनॉल मिश्रण पर चलने में सक्षम फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उत्सर्जन प्रमाणन संबंधी प्रावधानों में बदलाव किया गया है। E100 का मतलब लगभग शुद्ध एथेनॉल से है।
हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की फिलहाल पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा 20 फीसदी सीमा बढ़ाने की तत्काल योजना नहीं है।