Fact Check Of Media Reports On SIR: एसआईआर को लेकर देशभर में घमासान मचा हुआ है। राजधानी दिल्ली समेत देश के 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही इस प्रक्रिया पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच SIR को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट ने सियासी पारा और चढ़ा दिया। रिपोर्ट में चार दावे करते हुए प्रक्रिया में खामियों का आरोप लगाया गया। विपक्ष ने इन्हीं दावों को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।
अब इस पूरे विवाद में BJP की एंट्री हुई है। बीजेपी ने अपने X हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट कर मीडिया रिपोर्ट के चारों दावों का फैक्ट चेक किया और उन्हें खारिज किया है। ऐसे में सवाल है—मीडिया रिपोर्ट में क्या दावे किए गए थे और बीजेपी ने उनके जवाब में क्या तथ्य सामने रखे?
1. दावा- प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के दावे के अनुसार फाइनल वोटर लिस्ट में किसका नाम रहेगा इसका निर्धारण चुनाव आयोग का आईटी डिपार्टमेंट कर रहा है। ईआरओ की कोई शक्ति बची ही नही है।
फैक्ट चेक- इस दावे को लेकर राजौरा गार्डन की ERO इती अग्रवाल ने कहा ये दावा गलत है अभी भी लोगों के एप्लीकेशन प्राप्त हो रहे है। एसआईआर प्रक्रिया के तहत उनके नाम जोड़े जा रहे हैं उन्होंने आगे कहा चुनाव आयोग के द्वारा जो भी ईआरओ की शक्तियां होती है वो पूरी शक्तियां हमारे पास है। ईआरओ के पास लोगों के नाम को जोड़ने वाले साफ्टवेयर का एक्सेस है।
2. दावा- चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पूरी प्रक्रिया को सेंट्रलाइज कर दिया है।
फैक्ट चेक- एसआईआर प्रक्रिया बूथ लेवल से शुरू होती है। इस प्रक्रिया का चरण इस प्रकार है। BLO(बूध लेवल अधिकारी)- AERO(सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी)-ERO (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) -DEO( जिला निर्वाचन अधिकारी)
राजौरी गार्डन के AERO नवीन कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस के सभी दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दिया है। उन्होंने कहा प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है।
3. दावा- फार्म 6 में चुनाव आयोग ने बदलाव कर दिया है।
फैक्ट चेक- दावे को लेकर एईआरओ नवीन कुमार ने कहा है कि अभी एसआईआर का दौर चल रहा है जिसको लेकर डिक्लेरेशन फार्म भरा जा रहा है और आधार साल 2002 को रखा गया है। एसआईआर के बाद डिक्लेरेशन फॉर्म नहीं भरा जाएगा।
सवाल क्या चुनाव आयोग फॉर्म 6 में बदलाव कर सकता है? जवाब नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को लेकर कहा था कि एसआईआर चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है इससे जुड़े सभी फैसले लेने के लिए चुनाव आयोग स्वतंत्र है। एसआईआर के साथ फॉर्म 6 को जोड़ना चुनाव आयोग का फैसला है, लेकिन जो दावा किया जा रहा है कि क्या चुनाव आयोग फॉर्म 6 में बदलाव कर सकता वो गलत है इसकी शक्ति केवल सरकार के पास है।
4. दावा- दो चुनाव आयुक्तो सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 10 महीने में 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त के कई फैसलो पर आपत्ति दर्ज कराई है।
फैक्ट चेक- इंडियन एक्सप्रेस के इस आरोप का खंडन चुनाव आयोग ने करते हुए कहा है कि कि चर्चा को दौरान सुझाव देना असमहति नहीं होती है। फैसलों को लेकर सर्व सम्मति को ध्यान दिया गया तभी फैसला लिया गया है। दिए गए हैं। लेकिन अंतिम फैसला तीनों ने मिलकर लिए हैं।