डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान शिक्षाविद् और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन 5 सितंबर को मनाया जाता है। उनके सम्मान में इस दिन को पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन देश के उन सभी शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आइए, शिक्षक दिवस के इस खास मौके पर जानते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन से जुड़ी 8 खास और रोचक बातें।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के तौर पर की। उन्होंने कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में दर्शनशास्त्र पढ़ाया और विद्यार्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
डॉ. राधाकृष्णन ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी दर्शनशास्त्र का अध्यापन किया। उनकी विद्वता और भारतीय दर्शन की समझ ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।उन्होंने भारतीय दर्शन, धर्म और अध्यात्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में 'Indian Philosophy', 'The Philosophy of Rabindranath Tagore' और 'The Hindu View of Life' शामिल हैं।डॉ. राधाकृष्णन ने आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। बाद में वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान को आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है।स्वतंत्रता के बाद डॉ. राधाकृष्णन ने देश की सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे 1952 में भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और करीब एक दशक तक इस पद पर रहे। और आगे चलकर उन्होंने 13 मई 1962 को भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला। वे 1967 तक इस पद पर बने रहे।
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। वह इस सम्मान को प्राप्त करने वाले देश के पहले व्यक्तियों में से एक थे (उनके साथ सी. राजगोपालाचारी और डॉ. सी. वी. रमन को भी यह सम्मान मिला था)।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने कूटनीतिक भूमिका भी निभाई। 1949 से 1952 तक वे सोवियत संघ में भारत के राजदूत रहे। यह उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है कि वे शिक्षा और दर्शन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे।डॉ. राधाकृष्णन की जयंती यानी 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में शिक्षक के योगदान और शिक्षा के महत्व को सम्मान दिया जाता है। इस तरह राधाकृष्णन का जन्मदिन आज करोड़ों विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञान और गुरु के प्रति सम्मान का प्रतीक बन चुका है।