संजीव बालियान (फोटो- सोशल मीडिया) 
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संकट में साथ छोड़ गए शाह? CCI चुनाव हारने के बाद छलका बालियान का दर्द, बोले- मैं अकेला पड़ गया

CCI चुनाव हारने पर बालियान ने बोले कुछ दलों ने सारे वोट एक ही उम्मीदवार को दिए। इससे वहां मौजूद मेरे दोस्त, जो मुझे वोट देना चाहते, वे भी पार्टी लाइन के चलते दूसरे उम्मीदवार को वोट देने पर मजबूर हुए।

सौरभ शर्मा

CCI Election: दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया (CCI) के सचिव (प्रशासनिक) पद के चुनाव में वरिष्ठ भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने एक बार फिर जीत दर्ज की। उन्होंने अपने ही पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को लगभग 100 वोटों से हराया। हार के बाद बालियान ने कहा कि चुनाव पार्टी लाइन पर नहीं होना चाहिए था, लेकिन विपक्षी दलों ने अपने मत एक ही उम्मीदवार को देने का निर्णय लिया, जिससे उनके समर्थक भी मजबूरन पार्टी निर्देश मानने पर बाध्य हुए।

संजीव बालियान ने पहली बार CCI का चुनाव लड़ा था और उनका एजेंडा क्लब की पुरानी गरिमा बहाल करना और सत्ता व विपक्ष के सांसदों के बीच संवाद को बढ़ाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विपक्षी दलों ने अपने सांसदों को पार्टी लाइन पर वोट देने का निर्देश दिया, जबकि यह चुनाव राजनीतिक नहीं था। उन्होंने कहा कि इससे उनके व्यक्तिगत मित्र भी, जो उनका समर्थन करना चाहते थे, पार्टी निर्देशों के कारण उनके खिलाफ वोट देने को मजबूर हो गए।

अब जब संजीव बालियान कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया का चुनाव हारने के बाद यह दावा कर रहे हैं कि 'मैं अकेला पड़ गया' तो सवाल यह उठता है कि क्या आखिरी वक्त में अमित शाह भी उनका साथ छोड़ गए थे? क्योंकि बालियान को अमित शाह के समर्थन वाला उम्मीदवार बताया जा रहा था।

विपक्षी वोटों का रूडी के पक्ष में झुकाव

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बालियान ने बताया कि कुछ दलों के सभी वोट एक ही उम्मीदवार, यानी राजीव प्रताप रूडी, के पक्ष में पड़े। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर विपक्षी पार्टियों ने यह रणनीति बनाई। समाजवादी पार्टी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे उत्तर प्रदेश से हैं, जहां उनके अधिक मित्र हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व के कारण वे भी रूडी के पक्ष में वोट देने को मजबूर हुए।

चुनाव में सुधार लाने का था उद्देश्य

बालियान ने कहा कि उन्होंने यह चुनाव सुधार लाने के इरादे से लड़ा था। उनका उद्देश्य था कि CCI में सांसद और पूर्व सांसद अधिक सक्रिय हों और सत्ता-पक्ष व विपक्ष मिलकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि यह क्लब एक समय संसदीय संवाद का अहम केंद्र था, लेकिन अब सांसद यहां कम आते हैं। हार के बावजूद उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद किया और कहा कि वे भविष्य में भी क्लब की गरिमा बहाल करने के प्रयास जारी रखेंगे।

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