PM मोदी, निर्मला सीतारमण (Image- Social Media) 
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मोदी सरकार के फैसले पर RSS से जुड़े किसान संगठन का ऐतराज, वापस लेने की उठाई मांग

RSS News: आरएसएस के आनुषांगिक संगठन की ओर से इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा गया है। किसान संघ ने अपने पत्र में कहा है कि 320 लाख बेल्स कपास का सालाना उत्पादन भारत में होता है।

अर्पित शुक्ला

Bhartiya Kisan Sangh: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ ने कपास के आयात पर टैक्स छूट 31 दिसंबर तक बढ़ाने को लेकर ऐतराज जताया है। किसान संगठन का मानना है कि इस कदम से घरेलू किसानों को नुकसान होगा तथा लंबे समय में भारत की निर्भरता आयात पर बढ़ जाएगी।

आरएसएस के आनुषांगिक संगठन की तरफ से इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी पत्र लिखा गया है। किसान संघ ने अपने लेटर में कहा है कि 320 लाख बेल्स कपास का सालाना उत्पादन भारत में होता है, वहीं घरेलू डिमांड 391 लाख बेल्स की है। कपास के एक बेल्स में 170 किलोग्राम आता है।

12 फीसदी कपास भारत में बाहर से खरीदा जाता है

बता दें कि भारत की तरफ से हर साल 60 से 70 लाख बेल्स का ही आयात होता है। इसका मतलब हुआ कि कुल कपास के इस्तेमाल का लगभग 12 फीसदी भारत में बाहर से खरीदा जाता है। भारतीय किसान संघ ने कहा कि अगर हम इंपोर्ट पर छूट देते रहे तो फिर भारत कपास के निर्यातक देश होने की जगह अगले कुछ सालों में बड़ा आयातक बन जाएगा।

आयातक देश बनकर रह जाएगा

किसान संघ ने कहा कि इस साल कपास उत्पादन का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.2 फीसदी कम हो गया है। किसान संगठन ने कहा कि 'यदि घरेलू कपास के बीज की उपलब्धता नहीं बढ़ी तो फिर भारत निर्यातक की बजाय आयातक देश बनकर रह जाएगा।'

किसान संघ का कहना है कि कपास की कीमतें पहले ही 7000 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 6 हजार पर आ चुकी हैं। अगर टैक्स फ्री इंपोर्ट जारी रहा तो कीमतों में और भी कमी आ सकती है। इस पत्र में किसान संघ ने लिखा है कि यदि 2000 प्रति क्विंटल में बाहर से कपास आ जाएगा तो फिर भारतीय किसानों से कोई भी 5000 क्विंटल में क्यों खरीदेगा।

मालूम हो कि कपास के आयात पर पहले वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त से 30 सितंबर तक की छूट दी थी। अब इसको बढ़ाकर साल के आखिरी तक कर दिया है। भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहन मित्रा ने कहा कि सरकार को अपने निर्णय पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसे ही यदि आयात पर सब्सिडी जारी रही तो फिर आने वाले समय में विदेशी कपास के लिए भारत एक अच्छा बाजार होगा।

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